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ओडिशा: एसआईआर विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी आरएस गोपालन ने क्योंं लिया वीआरएस? विपक्ष ने उठाए सवाल
Thu, 01 Oct 2026 07:30 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, भुवनेश्वर, ओडिशा
पीटीआई, भुवनेश्वर, ओडिशा
Published by: अमन मौर्या
Updated Thu, 01 Oct 2026 07:30 PM IST
सार
ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आरएस गोपालन ने निजी कारणों से वीआरएस ले लिया है। जून 2028 में रिटायर्ड होने वाले गोपालन ने विपक्ष के आरोपों के बीच स्पष्ट किया कि उनके इस फैसले का वोटर लिस्ट विवाद से कोई संबंध नहीं है।
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एसआईआर विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी आरएस गोपालन ने लिया वीआरएस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आरएस गोपालन ने गुरुवार को निजी कारणों से सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। उन्हें जून 2028 में रिटायर होना था। उन्होंने अपने रिटायरमेंट से करीब 21 महीने पहले है। यह फैसला लिया है। गोपालन 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।जुलाई, 2024 से वे ओडिशा के सीईओ के रूप में काम कर रहे हैं। उनके पास आबकारी विभाग में सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार है। गोपालन ने बताया कि वीआरएस लेने का उनका फैसला राज्य में मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) से जुड़े विवाद से संबंधित नहीं है। उन्होंने बताया कि निजी कारणों से मैने वीआरएस का फैसला लिया। अब मैं अपने परिवार पर ध्यान दूंगा और जब तक मेरे बेटे की स्कूली शिक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक भुवनेश्वर में ही रहूंगा।
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क्यों लिया वीआरएस?
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका फैसला एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से उनके इस्तीफे की मांग से जुड़ा है, तो गोपालन ने कहा, 'अगर वे खुश होना चाहते हैं तो होने दें। मैंने 2 सितंबर को सरकारी सेवा में 25 साल पूरे कर लिए और इसके बाद वीआरएस लेने का फैसला किया।' उन्होंने कहा कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद उन्होंने इसकी योजना बनाई थी। ऐसे में उनके अनुसार, 21 सितंबर को इसके जारी होने के बाद मुख्य काम पूरा हो गया है।
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विपक्ष ने क्या आरोप लगाया?
एसआईआर प्रक्रिया के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में करीब 3.16 करोड़ मतदाता शामिल हैं। मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विपक्षी दलों बीजद और कांग्रेस ने इस प्रक्रिया की आलोचना भी की थी। बीजद ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब 27.50 लाख से अधिक मतदाताओं को सूची से हटा दिया गया और दावा किया कि इस मामले को छिपाया जा रहा है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि सीईओ ने मतदाता डेटा में हेरफेर किया है। गोपालन ने अपने करियर के दौरान कई अहम पदों पर काम किया है, जिनमें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के उप महानिदेशक, श्रम विभाग में सचिव और कृषि निदेशक के पद शामिल हैं। इस महीने की शुरुआत में, भुवनेश्वर के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस और आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीना ने भी इस्तीफा दे दिया था। ओडिशा सरकार ने 27 अगस्त को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया और आगे की कार्रवाई के लिए उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया।
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क्यों लिया वीआरएस?
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका फैसला एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से उनके इस्तीफे की मांग से जुड़ा है, तो गोपालन ने कहा, 'अगर वे खुश होना चाहते हैं तो होने दें। मैंने 2 सितंबर को सरकारी सेवा में 25 साल पूरे कर लिए और इसके बाद वीआरएस लेने का फैसला किया।' उन्होंने कहा कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद उन्होंने इसकी योजना बनाई थी। ऐसे में उनके अनुसार, 21 सितंबर को इसके जारी होने के बाद मुख्य काम पूरा हो गया है।
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विपक्ष ने क्या आरोप लगाया?
एसआईआर प्रक्रिया के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में करीब 3.16 करोड़ मतदाता शामिल हैं। मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विपक्षी दलों बीजद और कांग्रेस ने इस प्रक्रिया की आलोचना भी की थी। बीजद ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब 27.50 लाख से अधिक मतदाताओं को सूची से हटा दिया गया और दावा किया कि इस मामले को छिपाया जा रहा है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि सीईओ ने मतदाता डेटा में हेरफेर किया है। गोपालन ने अपने करियर के दौरान कई अहम पदों पर काम किया है, जिनमें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के उप महानिदेशक, श्रम विभाग में सचिव और कृषि निदेशक के पद शामिल हैं। इस महीने की शुरुआत में, भुवनेश्वर के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस और आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीना ने भी इस्तीफा दे दिया था। ओडिशा सरकार ने 27 अगस्त को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया और आगे की कार्रवाई के लिए उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया।