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सांसदों की शपथ: पूर्व SCBA प्रमुख बोले- संसद में बढ़ रहे दागी चिंताजनक, हस्तक्षेप जरूरी; अमृतपाल-रशीद पर नजरें
Fri, 07 Jun 2024 07:41 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा झा
Updated Fri, 07 Jun 2024 07:41 PM IST
सार
दो आतंकवाद के आरोप में जेल में बंद कैदियों के चुनाव लड़ने और जीतने का मामला इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। अब हाल ही में एक वरिष्ठ वकील ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्थिति अजीब है जहां कैदी वोट नहीं कर सकते, लेकिन चुनाव लड़ सकते हैं।
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इंजीनियर राशिद और अमृतपाल सिंह
- फोटो : फाइल
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विस्तार
दो आतंकवाद के आरोप में जेल में बंद कैदियों के चुनाव लड़ने और जीतने का मामला इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। अब हाल ही में एक वरिष्ठ वकील ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्थिति अजीब है जहां कैदी वोट नहीं कर सकते, लेकिन चुनाव लड़ सकते हैं। बता दें कि इन कैदियों के सांसद पद की शपथ देने को लेकर भी अभी काफी चर्चा चल रही है।
इस लोकसभा चुनाव में जेल में बंद कैदियों के चुनाव लड़ने और जीतने के बाद कानून और संविधान के बीच जंग शुरू हो गई है। जहां एक ओर कानून कैदी को शपथ ग्रहण समारोह में जाने से रोकने की ताकत रखता है, वहीं संवैधानिक अधिकार उन्हें शपथ लेने की अनुमति दे रहा है।
मंगलवार को चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा की। जिसमें एक सिख उपदेशक अमृतपाल सिंह ने खडूर साहिब निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की है। वहीं शेख अब्दुल रशीद ने बारामूला सीट जीती है। अमृतपाल सिंह को पिछले साल अप्रैल में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, कुछ हफ़्ते बाद वह पुलिस से बच निकला था और उसके खिलाफ सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया था। उसने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को हराकर खडूर साहिब लोकसभा सीट 1,97,120 वोटों से जीती। वहीं इंजीनियर रशीद ने बारामूला सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उसने जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को हराकर 2,04,142 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। इंजीनियर राशिद को 4,72,481 वोट प्राप्त किए।
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पंजाब के अमृतपाल सिंह और जम्मू कश्मीर से अब्दुल रशीद के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने और जीतने पर बात करते हुए एक वरिष्ठ वकील ने विकास सिंह ने कहा कि आपराधिक आरोपों वाले विधायकों की संख्या बढ़ रही है। यह विडंबना है कि जेलो में बंद लोग वोट नहीं दे सकते, लेकिन चुनाव लड़ सकते है, जीत सकते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा नहीं ऐसे लोग संसद के लिए चुने जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन आरोपों को निर्दिष्ट करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता है। जिनके तहत उम्मीदवार चुनाव लड़ने से अयोग्य हो जाएंगे। विडंबना यह है कि लोग जेलों में हैं वोट नहीं दे सकते, लेकिन चुनाव लड़ सकते हैं और जीत सकते हैं। बता दें कि विकास सिंह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं।
उन्होंने बताया कि एक संसदीय सीट 60 दिनों से अधिक समय तक खाली नहीं रह सकती। संसद को हस्तक्षेप करना चाहिए और ऐसे लोगों को निर्वाचित नहीं होने देना चाहिए। ऐसे उम्मीदवारों को दोबारा चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि जब तक वे हिरासत में रहेंगे तब तक उनके निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जहां उन्हें अपनी सीटें खाली करनी पड़ती हैं, उन्हें तब तक फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि वे हिरासत से बाहर न आ जाएं। जितने दिन वे जेल में बिताएंगे, निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि एक कानून लाने का समय आ गया है। कहीं न कहीं एक प्रावधान है जो उन्हें किसी को अधिकृत करके अपना नामांकन दाखिल करने की अनुमति देता है, इसी तरह उन्होंने चुनाव लड़ा है।
वहीं दूसरी ओर भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पद्मनाभन ने कहा कि संविधान की खूबसूरती है कि वो उन लोगों की रक्षा करता है जो इसमें विश्वास भी नहीं करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने कहा कि संसद में ऐसे मामलों से बचने का उपाय शीघ्र सुनवाई है। जिसके तहत जेल में बंद उम्मीदवारों को या तो बरी किया जाए या दोषी ठहराया जाए। आरपी अधिनियम 1951 की धारा 8 (3) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है या उसको 2 साल या उससे अधिक की कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो यह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा।
संविधान विशेषज्ञ ने कहा कि जेल में बंद खालिस्तानी अलगाववादी और वारिस पंजाब डी प्रमुख अमृतपाल सिंह और इंजीनियर अब्दुल रशीद लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे दोनों अदालत की अनुमति से शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने और महत्वपूर्ण मतदान में भाग लेने के लिए संसद आ सकते हैं। "वे दोनों संसद आ सकते हैं। पहली बात यह है कि उन्हें अब आना होगा और शपथ लेनी होगी। अदालत और संबंधित अधिकारियों की अनुमति से वे बाहर आ सकते हैं और शपथ ले सकते हैं। उन्हें पुलिस लेकर आएगी। उन्हें संसद में ले जाया जाएगा, जिसके बाद उन्हें संसद सुरक्षा के हवाले कर दिया जाएगा। शपथ लेने के बाद उन्हें पुलिस के साथ वापस जेल भेज दिया जाएगा।
बता दें कि आतंकी वित्तपोषण के आरोप में रशीद 9 अगस्त, 2019 से तिहाड़ जेल में बंद है। वहीं अमृतपाल सिंह पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अमृतपाल सिंह असम की डिब्रूगढ़ जेल में कैद हैं।
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इस लोकसभा चुनाव में जेल में बंद कैदियों के चुनाव लड़ने और जीतने के बाद कानून और संविधान के बीच जंग शुरू हो गई है। जहां एक ओर कानून कैदी को शपथ ग्रहण समारोह में जाने से रोकने की ताकत रखता है, वहीं संवैधानिक अधिकार उन्हें शपथ लेने की अनुमति दे रहा है।
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मंगलवार को चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा की। जिसमें एक सिख उपदेशक अमृतपाल सिंह ने खडूर साहिब निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की है। वहीं शेख अब्दुल रशीद ने बारामूला सीट जीती है। अमृतपाल सिंह को पिछले साल अप्रैल में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, कुछ हफ़्ते बाद वह पुलिस से बच निकला था और उसके खिलाफ सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया था। उसने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को हराकर खडूर साहिब लोकसभा सीट 1,97,120 वोटों से जीती। वहीं इंजीनियर रशीद ने बारामूला सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उसने जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को हराकर 2,04,142 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। इंजीनियर राशिद को 4,72,481 वोट प्राप्त किए।
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पंजाब के अमृतपाल सिंह और जम्मू कश्मीर से अब्दुल रशीद के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने और जीतने पर बात करते हुए एक वरिष्ठ वकील ने विकास सिंह ने कहा कि आपराधिक आरोपों वाले विधायकों की संख्या बढ़ रही है। यह विडंबना है कि जेलो में बंद लोग वोट नहीं दे सकते, लेकिन चुनाव लड़ सकते है, जीत सकते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा नहीं ऐसे लोग संसद के लिए चुने जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन आरोपों को निर्दिष्ट करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता है। जिनके तहत उम्मीदवार चुनाव लड़ने से अयोग्य हो जाएंगे। विडंबना यह है कि लोग जेलों में हैं वोट नहीं दे सकते, लेकिन चुनाव लड़ सकते हैं और जीत सकते हैं। बता दें कि विकास सिंह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं।
उन्होंने बताया कि एक संसदीय सीट 60 दिनों से अधिक समय तक खाली नहीं रह सकती। संसद को हस्तक्षेप करना चाहिए और ऐसे लोगों को निर्वाचित नहीं होने देना चाहिए। ऐसे उम्मीदवारों को दोबारा चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि जब तक वे हिरासत में रहेंगे तब तक उनके निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जहां उन्हें अपनी सीटें खाली करनी पड़ती हैं, उन्हें तब तक फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि वे हिरासत से बाहर न आ जाएं। जितने दिन वे जेल में बिताएंगे, निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि एक कानून लाने का समय आ गया है। कहीं न कहीं एक प्रावधान है जो उन्हें किसी को अधिकृत करके अपना नामांकन दाखिल करने की अनुमति देता है, इसी तरह उन्होंने चुनाव लड़ा है।
वहीं दूसरी ओर भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पद्मनाभन ने कहा कि संविधान की खूबसूरती है कि वो उन लोगों की रक्षा करता है जो इसमें विश्वास भी नहीं करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने कहा कि संसद में ऐसे मामलों से बचने का उपाय शीघ्र सुनवाई है। जिसके तहत जेल में बंद उम्मीदवारों को या तो बरी किया जाए या दोषी ठहराया जाए। आरपी अधिनियम 1951 की धारा 8 (3) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है या उसको 2 साल या उससे अधिक की कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो यह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा।
संविधान विशेषज्ञ ने कहा कि जेल में बंद खालिस्तानी अलगाववादी और वारिस पंजाब डी प्रमुख अमृतपाल सिंह और इंजीनियर अब्दुल रशीद लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे दोनों अदालत की अनुमति से शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने और महत्वपूर्ण मतदान में भाग लेने के लिए संसद आ सकते हैं। "वे दोनों संसद आ सकते हैं। पहली बात यह है कि उन्हें अब आना होगा और शपथ लेनी होगी। अदालत और संबंधित अधिकारियों की अनुमति से वे बाहर आ सकते हैं और शपथ ले सकते हैं। उन्हें पुलिस लेकर आएगी। उन्हें संसद में ले जाया जाएगा, जिसके बाद उन्हें संसद सुरक्षा के हवाले कर दिया जाएगा। शपथ लेने के बाद उन्हें पुलिस के साथ वापस जेल भेज दिया जाएगा।
बता दें कि आतंकी वित्तपोषण के आरोप में रशीद 9 अगस्त, 2019 से तिहाड़ जेल में बंद है। वहीं अमृतपाल सिंह पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अमृतपाल सिंह असम की डिब्रूगढ़ जेल में कैद हैं।