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बुलेट ट्रेन: साबरमती पर 480 मीटर लंबा पुल तैयार, 36 मीटर ऊंचे पुल में आठ पिलर; गुजरात में कितना हुआ काम?
Sun, 04 Oct 2026 09:15 PM IST
पवन पांडेय
अमर उजाला नेटवर्क, अहमदाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, अहमदाबाद
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 04 Oct 2026 09:15 PM IST
सार
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में साबरमती नदी पर 480 मीटर लंबा और 36 मीटर ऊंचा पुल बनकर तैयार हो गया है। आठ पिलरों वाले इस पुल में लंबे स्पैन के लिए बैलेंस्ड कैंटिलीवर तकनीक अपनाई गई। गुजरात में 21 में से 18 नदी पुल पूरे हो चुके हैं।
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बुलेट ट्रेन: साबरमती पर 480 मीटर लंबा पुल तैयार
- फोटो : ANI
विस्तार
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने साबरमती नदी पर 480 मीटर लंबे और 36 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण पूरा कर लिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार एनएचएसआरसीएल ने शनिवार को इस पुल के पूरा होने की जानकारी दी। यह पुल साबरमती और अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित है और परियोजना के प्रमुख ढांचागत निर्माणों में शामिल है। करीब 118 फीट ऊंचा यह पुल 12 मंजिला इमारत के बराबर है। यह साबरमती स्टेशन से करीब एक किलोमीटर और अहमदाबाद स्टेशन से करीब चार किलोमीटर दूर है। पुल पश्चिम रेलवे की अहमदाबाद-दिल्ली मुख्य रेल लाइन के समानांतर बनाया गया है। यह रेल लाइन जमीन से करीब 14.8 मीटर की ऊंचाई पर है। मौजूदा रेल ढांचे से जरूरी ऊर्ध्वाधर दूरी बनाए रखने के लिए पुल के पिलर सामान्य से अधिक ऊंचे डिजाइन किए गए हैं।
नदी में कम पिलर, लंबे स्पैन
पुल को आठ गोलाकार पिलर का सहारा दिया गया है। प्रत्येक पिलर का व्यास 6 से 6.5 मीटर के बीच है। इनमें चार पिलर नदी के तल में, दो नदी के किनारे और दो किनारों के बाहर बनाए गए हैं। पिलरों की यह व्यवस्था नदी के जलप्रवाह में कम से कम बाधा पैदा करने के उद्देश्य से की गई है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के ज्यादातर नदी पुलों में करीब 40 मीटर के स्पैन हैं, लेकिन साबरमती पुल में अपेक्षाकृत लंबे स्पैन का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कुल सात स्पैन हैं, जिनमें पांच स्पैन 76 मीटर और दो स्पैन 50 मीटर के हैं। लंबे स्पैन के कारण नदी के भीतर पिलरों की संख्या कम रखने में मदद मिली है। प्रत्येक स्पैन को निर्माण स्थल पर ही 23-23 सेगमेंट तैयार कर जोड़कर बनाया गया है। एनएचएसआरसीएल के मुताबिक, इसके निर्माण में सटीक इंजीनियरिंग, प्रशिक्षित मानव संसाधन और हर चरण में गुणवत्ता जांच का इस्तेमाल किया गया।
बिना पारंपरिक मचान के बना पुल
साबरमती पुल के निर्माण में बैलेंस्ड कैंटिलीवर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। लंबी दूरी के पुलों और गहरे जलक्षेत्रों के ऊपर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली इस तकनीक की खासियत यह है कि पुल के डेक के नीचे पारंपरिक मचान लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इस तकनीक में पिलर से दोनों दिशाओं में क्रमशः सेगमेंट लगाए जाते हैं और उन्हें पोस्ट-टेंशनिंग के जरिए जोड़ा जाता है। दोनों तरफ समान रूप से निर्माण आगे बढ़ाने से पुल का ढांचा संतुलित बना रहता है और लगातार पुल डेक तैयार होता जाता है।
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25 नदी पुल, 18 गुजरात में पूरे
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में कई मौजूदा ढांचागत सुविधाओं को पार करना है। इनमें फ्लाईओवर, पुल, रेलवे लाइन और मेट्रो कॉरिडोर शामिल हैं। पूरे कॉरिडोर में कुल 25 नदी पुल बनाए जा रहे हैं। इनमें 21 गुजरात और चार महाराष्ट्र में हैं। एनएचएसआरसीएल के अनुसार गुजरात में प्रस्तावित 21 नदी पुलों में से 18 का निर्माण पूरा हो चुका है। साबरमती पुल का पूरा होना परियोजना की गति और जटिल इंजीनियरिंग ढांचे के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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नदी में कम पिलर, लंबे स्पैन
पुल को आठ गोलाकार पिलर का सहारा दिया गया है। प्रत्येक पिलर का व्यास 6 से 6.5 मीटर के बीच है। इनमें चार पिलर नदी के तल में, दो नदी के किनारे और दो किनारों के बाहर बनाए गए हैं। पिलरों की यह व्यवस्था नदी के जलप्रवाह में कम से कम बाधा पैदा करने के उद्देश्य से की गई है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के ज्यादातर नदी पुलों में करीब 40 मीटर के स्पैन हैं, लेकिन साबरमती पुल में अपेक्षाकृत लंबे स्पैन का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कुल सात स्पैन हैं, जिनमें पांच स्पैन 76 मीटर और दो स्पैन 50 मीटर के हैं। लंबे स्पैन के कारण नदी के भीतर पिलरों की संख्या कम रखने में मदद मिली है। प्रत्येक स्पैन को निर्माण स्थल पर ही 23-23 सेगमेंट तैयार कर जोड़कर बनाया गया है। एनएचएसआरसीएल के मुताबिक, इसके निर्माण में सटीक इंजीनियरिंग, प्रशिक्षित मानव संसाधन और हर चरण में गुणवत्ता जांच का इस्तेमाल किया गया।
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बिना पारंपरिक मचान के बना पुल
साबरमती पुल के निर्माण में बैलेंस्ड कैंटिलीवर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। लंबी दूरी के पुलों और गहरे जलक्षेत्रों के ऊपर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली इस तकनीक की खासियत यह है कि पुल के डेक के नीचे पारंपरिक मचान लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इस तकनीक में पिलर से दोनों दिशाओं में क्रमशः सेगमेंट लगाए जाते हैं और उन्हें पोस्ट-टेंशनिंग के जरिए जोड़ा जाता है। दोनों तरफ समान रूप से निर्माण आगे बढ़ाने से पुल का ढांचा संतुलित बना रहता है और लगातार पुल डेक तैयार होता जाता है।
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25 नदी पुल, 18 गुजरात में पूरे
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में कई मौजूदा ढांचागत सुविधाओं को पार करना है। इनमें फ्लाईओवर, पुल, रेलवे लाइन और मेट्रो कॉरिडोर शामिल हैं। पूरे कॉरिडोर में कुल 25 नदी पुल बनाए जा रहे हैं। इनमें 21 गुजरात और चार महाराष्ट्र में हैं। एनएचएसआरसीएल के अनुसार गुजरात में प्रस्तावित 21 नदी पुलों में से 18 का निर्माण पूरा हो चुका है। साबरमती पुल का पूरा होना परियोजना की गति और जटिल इंजीनियरिंग ढांचे के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।