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Nuh Violence: दंगा शांत कराने वाले अर्धसैनिक बलों का बकाया नहीं चुका रही हरियाणा सरकार, फंसे 62 करोड़ रुपये

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 04 Aug 2023 03:43 PM IST
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सार
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मेवात में हुए दंगे के दौरान सीएपीएफ की कंपनियां भेजने का जो आदेश जारी किया है, उसमें हरियाणा सरकार को पिछले भुगतान की याद दिलाई है। राज्य सरकार से प्रार्थना की गई है कि वह 62.76 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान करे...
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Nuh Violence: Haryana government is not paying the dues of the paramilitary forces
CAPF - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

देश में जहां कहीं भी दंगा होता है, चुनाव या अन्य कोई ऐसी गतिविधि होती है, जिसमें कानून व्यवस्था के बिगड़ने का अंदेशा बना रहता है, तो वहां पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' को तैनात करने की मांग की जाती है। राज्यों की मांग पर विचार कर केंद्रीय गृह मंत्रालय, तुरंत अर्धसैनिक बलों को वहां के लिए रवाना कर देता है। हैरानी की बात है कि मुसीबत के समय राज्यों में कानून व्यवस्था संभालने में मदद करने वाले केंद्रीय बलों का भुगतान करने में राज्य सरकारें सुस्ती बरतती हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मेवात में हुए दंगे के दौरान सीएपीएफ की कंपनियां भेजने का जो आदेश जारी किया है, उसमें हरियाणा सरकार को पिछले भुगतान की याद दिलाई है। राज्य सरकार से प्रार्थना की गई है कि वह 62.76 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान करे। यह राशि पहली अप्रैल 2023 से देय है।

हरियाणा सरकार ने की थी सीएपीएफ भेजने की मांग

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को 31 जुलाई को लिखे पत्र में उक्त बात कही है। हरियाणा सरकार द्वारा मेवात में हुई हिंसा के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालने में मदद करने के लिए सीएपीएफ को भेजने की मांग की गई थी। हरियाणा सरकार के आग्रह पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मेवात की कानून व्यवस्था की समीक्षा की। उसके बाद वहां पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की बीस कंपनियों को भेजा गया। इनमें सीआरपीएफ की चार कंपनियां, जिनमें दो महिला कंपनी भी शामिल हैं, भेजी गई थीं। इसके अलावा रेपिड एक्शन फोर्स की 12 कंपनियां तैनात की गईं। बीएसएफ और आईटीबीपी की दो-दो कंपनियां लगाई गई हैं। बाद में पांच अतिरिक्त कंपनियां भी रवाना की गई हैं।

सीआरपीएफ के ही 44083.51 करोड़ रुपये फंसे हैं

केंद्रीय गृह मंत्रालय बिना कोई देरी किए 'सीएपीएफ' को संबंधित राज्य के लिए रवाना कर देता है। हालांकि इस तरह के अधिकांश टॉस्क 'सीआरपीएफ' द्वारा पूरे किए जाते हैं। अब राज्यों की ओर केंद्रीय सुरक्षा बलों के 49 हजार करोड़ रुपये फंस गए हैं। यह आंकड़ा गत अप्रैल तक का है। मतलब, इतनी राशि बकाया है। इसमें अकेले सीआरपीएफ के ही 44083.51 करोड़ रुपये हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दर्जनभर राज्यों से कई बार आग्रह किया है कि इस राशि का भुगतान किया जाए, लेकिन राज्यों ने इतनी बड़ी राशि लौटाने की बजाए, उसे माफ करने की बात कह दी। केंद्र सरकार अब इस बकाया राशि का भुगतान कराने के लिए सख्त कदम उठा सकती है।

12 राज्यों की तरफ बकाया हैं 49912.37 करोड़ रुपये

गत संसद सत्र के दौरान राज्यसभा में पेश हुई गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की 242वीं रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था। उत्तर प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सांसद बृजलाल, जो गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे हैं, उनकी रिपोर्ट में बताया गया है कि विभिन्न राज्यों की तरफ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 49912.37 करोड़ रुपये बकाया हैं। जिन राज्यों ने अभी तक अपना तय भुगतान नहीं किया है, उनमें गोवा, छत्तीसगढ़, ओडिशा, नागालैंड, मिजोरम, आंध्र प्रदेश, असम, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और जम्मू कश्मीर शामिल हैं। संसदीय समिति ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूछा था कि इस बकाया राशि के भुगतान के लिए क्या प्रयास किए गए हैं। मंत्रालय का जवाब था कि इस संबंध में नियमित आग्रह किया जा रहा है। प्रत्येक तीन माह में इस तरह का आग्रह किया जाता है।

मासिक स्तर पर उठाया जाए यह मुद्दा

गृह मंत्रालय ने संसदीय समिति को सूचित किया था कि इन राज्यों ने उक्त राशि को माफ करने के लिए प्रार्थना दी है। समिति ने मंत्रालय से कहा है कि इस बाबत कठोरता से बात की जाए। उक्त राशि के भुगतान के लिए राज्यों के साथ प्रमुखता से इस विषय को उठाया जाए। इतना ही नहीं, समिति ने मासिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। भारत सरकार को भी इस विषय में गंभीरता से प्रयास करने चाहिए, ताकि समयबद्ध तरीके से 49912.37 करोड़ रुपये का भुगतान संभव हो सके। आंतरिक ड्यूटी में सीआरपीएफ की बेहतरीन भूमिका, इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई बार इस बल की सराहना कर चुके हैं।

दंगे/चुनाव में होती है सीआरपीएफ की मांग 

2021 में पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ कैंप में पहुंचे गृह मंत्री शाह ने कहा था कि देश में कहीं भी चुनाव या दंगे होते हैं तो संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री मांग करते हैं कि उन्हें सीआरपीएफ के जवान उपलब्ध कराए जाएं। पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के 84वें स्थापना दिवस पर आयोजित परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए अमित शाह ने कहा, मैं किसी कार्यक्रम में व्यस्त रहता हूँ और तभी किसी अप्रिय घटना का समाचार आता है, मगर साथ में जब यह बात भी पता चलती है कि सीआरपीएफ वहां पहुंच गई है, तो मैं निश्चिंत होकर आगे का कार्यक्रम चालू रखता हूं। मुझे भरोसा है कि गलत मंसूबे वाले लोगों को नसीहत करे बगैर सीआरपीएफ जवान वापस नहीं लौटता।

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