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Nuh Violence: सांप्रदायिक हिंसा में विज से मेल नहीं खा रहे दुष्यंत के सुर, केंद्रीय मंत्री ने भी उठाए सवाल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 02 Aug 2023 05:41 PM IST
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सार
Nuh Violence: हरियाणा में भाजपा और जजपा, दोनों पार्टियां एक दूसरे की सहयोगी हैं। प्रदेश में लोकसभा की सभी दस सीटों पर भाजपा सांसद हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा के गणित में भाजपा के पास 41 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 31 एमएलए हैं। जजपा के 10 विधायक हैं। इनेलो और हलोपा का भी एक-एक विधायक है। निर्दलीय विधायकों की संख्या सात है...
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Nuh Violence: Dushyant chautala tone not matching with anil Vij comments, Union Minister also raised questions
Nuh Violence - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

हरियाणा के मेवात क्षेत्र के नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर 'भाजपा' और 'जजपा' के सुर मेल नहीं खा रहे हैं। ये अलग बात है कि 'जजपा' नेता दुष्यंत चौटाला, प्रदेश की भाजपा सरकार में डिप्टी सीएम हैं। प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है कि मेवात की हिंसा के पीछे कोई बड़ी साजिश है। दूसरी ओर, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कहते हैं, नूंह में यात्रा आयोजकों ने जिला प्रशासन को पूरी जानकारी नहीं दी। प्रशासन को यह नहीं मालूम था कि यात्रा में कितनी भीड़ जुटेगी। खैर, इस हिंसा के लिए जो भी जिम्मेदार है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। इस बीच केंद्रीय मंत्री और गुरुग्राम के लोकसभा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने हिंदू संगठनों द्वारा निकाली गई ब्रजमंडल यात्रा पर सवाल उठा दिया है। इस तरह की यात्रा में हथियार लेकर कौन जाता है। एक पक्ष की ओर से उकसावे वाली कार्रवाई तो हुई है। उन्होंने कहा, इसका अर्थ यह भी नहीं है कि दूसरे पक्ष की तरफ से कोई गड़बड़ी नहीं हुई है या उकसाने का प्रयास नहीं किया गया।

भाजपा और जजपा के बीच क्यों बनी थी दूरी

हरियाणा में भाजपा और जजपा, दोनों पार्टियां एक दूसरे की सहयोगी हैं। प्रदेश में लोकसभा की सभी दस सीटों पर भाजपा सांसद हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा के गणित में भाजपा के पास 41 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 31 एमएलए हैं। जजपा के 10 विधायक हैं। इनेलो और हलोपा का भी एक-एक विधायक है। निर्दलीय विधायकों की संख्या सात है। जून के आखिरी सप्ताह में दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। एक बार तो ऐसी स्थिति बन गई थी कि भाजपा और जजपा गठबंधन में दरार आ सकती है। उचाना कलां से जजपा विधायक और प्रदेश के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कह दिया था कि तीन-तीन लोगों के पेट में दर्द था, लेकिन इसके बाद भी वह उचाना से ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। चौटाला ने यह बात इसलिए कही, क्योंकि हरियाणा के भाजपा प्रभारी बिप्लब देब ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को उचाना कलां का अगला विधायक बताया था।  

समर्थन के बदले मंत्री पद भी तो दिए हैं

चौटाला के बयान पर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई थी। भाजपा के प्रभारी बिप्लब देब ने भी चौटाला पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, न तो मेरे पेट में दर्द है और न ही मैं डॉक्टर हूं। मेरा काम भाजपा संगठन को मजबूत करना है। अगर जजपा ने हमारी सरकार को समर्थन दिया है, तो कोई अहसान नहीं किया। इसके बदले में उन्हें मंत्रिपद दिए गए हैं। इसके बाद कई निर्दलीय विधायकों ने दिल्ली में भाजपा नेताओं से मुलाकात की थी। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि अब प्रदेश में भाजपा-जजपा गठबंधन में दरार आ सकती है। धर्मपाल गोंदर, राकेश दौलताबाद, रणधीर सिंह और सोमवीर सांगवान की दिल्ली में बिप्लब देब के साथ मुलाकात हुई। हलोपा विधायक गोपाल कांडा पहले से ही भाजपा के करीब हैं। भाजपा ने वह प्लान तैयार कर लिया कि जजपा के साथ पार्टी का गठबंधन टूटता है, तो उस स्थिति में सरकार को कोई खतरा नहीं होगा। निर्दलीय विधायकों की मदद से खट्टर सरकार चलती रहेगी।

जिला प्रशासन को पूरी जानकारी नहीं दी

मेवात में हुई हिंसा पर बुधवार को हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा, नूंह में यात्रा आयोजकों की तरफ से जिला प्रशासन को पूरी जानकारी नहीं दी गई। इस तरह का घटनाक्रम, हरियाणा में पहले कभी नहीं हुआ है। मेवात का अपना एक इतिहास रहा है। यहां के लोगों का देश की एकता और अखंडता में योगदान है। जो कोई भी इस घटना में शामिल है, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। भले ही वह व्यक्ति, किसी भी पार्टी या समुदाय से क्यों न हो। वहीं, प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज का कहना है, यात्रा के दौरान पर्याप्त मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात थी। जिस तरह से हिंसा में हथियार लहराए गए, गोलियां चलाई गईं, उसे देखकर लगता है, ये सब योजनाबंद तरीके से हुआ है। इसके पीछे कोई तो साजिश है। अगर कोई भी मास्टरमाइंड है, तो उसे बाहर निकालेंगे। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने भी मेवात की हिंसा के पीछे साजिश होने की बात कही है। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा, धार्मिक यात्रा में यदि कोई तलवार और डंडे लेकर आता है, तो वह ठीक नहीं है। ये पता लगाना चाहिए कि यात्रा में शामिल लोगों को हथियार रखने के लिए किसने कहा था। किसी के हाथ में तलवार तो कोई लाठी डंडा लेकर आता है। दोनों ही तरफ से उकसावे वाली कार्रवाई हुई है। मेवात के लोगों ने हमेशा से भाईचारे की मिसाल कायम की है।

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