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बिना गारंटी दिया लोन नहीं वसूल पा रहे बैंक, NPA का बढ़ता प्रेशर
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 23 May 2018 04:42 AM IST
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केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुद्रा योजना के अकाउंट बैंकों की परेशानी बढ़ाने लगी हैं। बिना किसी गारंटी के लोगों को दी जाने वाली राशि को वसूलने के लिए बैंकों के हाथ खाली हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत ऋण तो दे दिया, लेकिन इसके नॉन परफॉर्मिंग असेट्स की संख्या बढ़ने लगी है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस के बैंक ऑफ बड़ौदा के वरिष्ठ अफसर का कहना है कि उनके यहां इस तरह के 20 प्रतिशत के करीब अकाउंट एनपीए की श्रेणी में आ गए हैं।
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स्टेट बैंक इंडिया में इस बारे में पूछे जाने पर बैंक के सूत्र का कहना है कि समस्या बढ़ रही है। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि यह राशि कैसे वसूल की जाएगी। बैंक के अधिकारी का कहना है कि यह ऋण बिना किसी गारंटी के दिया गया है। इसलिए बैंक के हाथ खाली हैं। जिन लोगों ने मुद्रा योजना के तहत ऋण लिया है और राशि नहीं लौटा रहे हैं, उनसे निबटने के तरीके तलाशे जा रहे हैं। लोगों द्वारा मुद्रा योजना के तहत पैसा लेने और उसे न लौटाने के पीछे बैंक के अधिकारियों का कहना है कि ग्राहकों में बेईमानी आ रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा, जौनपुर के एक अधिकारी का कहना है कि तमाम लोग सांसद और विधायक की चिट्ठी लेकर लोन निकालने (स्थानीय कोड, जिसका आशय केवल बैंक से पैसा लेना है) के लिए आते हैं।
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बताते हैं सरकारी क्षेत्र के कुछ बैंकों का इस मामले में ग्राफ ठीक है। उनके यहां मुद्रा योजना के तहत खुले खाते के एनपीए का प्रतिशत थोड़ा कम है, लेकिन निजी क्षेत्र के कुछ बैंकों की स्थिति काफी खराब है। जनधन अकाऊंट के बारे में पूछे जाने पर बैंक के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में बैंकों की स्थिति काफी खराब है। बैंकिग परिचालन में तमाम समस्याएं हैं। बैंक वित्तीय बोझ और काम के बोझ से दबते रहे हैं।
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नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर सार्वजनिक क्षेत्र की एक बैंक के रीजनल मैनेजर स्तर के अधिकारी का कहना है कि पहले बैंक अपने कर्मियों को सम्मान पूर्वक जीवन जीने लायक वेतन और भत्ता देता था। उन दिनों की तुलना में आज हाथ बहुत टाइट है। दो-ढाई प्रतिशत के इनक्रीमेंट देने जैसे निर्णय लेने पड़ रहे हैं। वैकेंसी के बारे में पूछे जाने पर सूत्र का कहना है कि बैंकों के पास जिस तरह से काम बढ़ा है, उसे देखते हुए काफी पहले से स्वीकृत पदों में काफी रिक्तियां हैं।