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वंदे मातरम का विरोध: राज्यपाल आर्लेकर बोले- केरल के केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रदर्शन के पीछे बड़ी साजिश
Wed, 07 Oct 2026 06:53 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, कासरगोड
पीटीआई, कासरगोड
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Wed, 07 Oct 2026 06:53 PM IST
सार
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल में वंदे मातरम से जुड़े कार्यक्रम के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शन को लेकर साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि मामले को केवल छात्रों के नारे लगाने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए और यह पता लगाना जरूरी है कि ऐसे विचारों के पीछे कौन है।
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राज्यपाल आर्लेकर बोले- पता लगाएं इसके पीछे कौन है
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
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केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने बुधवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल में वंदे मातरम से जुड़े कार्यक्रम के विरोध में हुए प्रदर्शन के पीछे साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाज में वंदे मातरम के खिलाफ भावनाएं फैलाने की कथित कोशिशों के पीछे कौन लोग हैं, इसकी पहचान की जानी चाहिए।
विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए आर्लेकर ने केंद्रीय विश्वविद्यालय से वंदे मातरम से जुड़े विषयों पर शोध करने का भी आग्रह किया।
केरल के राज्यपाल बोले- मामला सिर्फ छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं
आर्लेकर ने कहा कि यह संस्थान की जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने मंगलवार को हुई घटनाओं को "अलग-थलग घटना नहीं" बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि इन घटनाओं के संबंध दूसरे संस्थानों और कार्यक्रमों से भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमें यह समझने की कोशिश करनी होगी कि आखिर यह क्या था।"
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उन्होंने कहा कि पूरे मामले को केवल छात्रों की ओर से वंदे मातरम के खिलाफ नारे लगाने तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह केवल कुछ छात्रों द्वारा वंदे मातरम के खिलाफ नारे लगाने तक सीमित नहीं है। हमें पता लगाना होगा कि इसके पीछे कौन है। केवल पता लगाना ही नहीं, बल्कि हमें कार्रवाई भी करनी होगी।"
कहां से आ रहे हैं ऐसे विचार, इसकी हो जांच : आर्लेकर
राज्यपाल ने सवाल उठाया कि इस तरह के विचार कहां से आ रहे हैं और कथित तौर पर उन्हें समाज में फैलाने की कोशिश कौन कर रहा है। उन्होंने कहा, "समस्या यह है कि ये विचार कहां से आ रहे हैं। इन्हें फैलाने की कोशिश कौन कर रहा है? कौन इस तरह की बातों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है? हमें इसकी जांच करनी होगी, इसे समझना होगा और पता लगाना होगा कि यह क्या है।"
आर्लेकर ने कहा, "यह केवल वंदे मातरम के खिलाफ नारे लगाने का मामला नहीं है। यह एक बड़ी साजिश है, जो अब हमारे समाज में प्रवेश कर चुकी है। हम सभी को बहुत सतर्क रहना होगा।" उन्होंने मंगलवार की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें केवल विश्वविद्यालय के पुस्तकालय सभागार की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि समाज में इस पर चर्चा होनी चाहिए।
केरल के केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रों ने किया था प्रदर्शन
राज्यपाल ने आरोप लगाया कि केवल वंदे मातरम ही नहीं, बल्कि व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशें भी की जा रही हैं। उन्होंने कहा, "वंदे मातरम हमारा गौरव है और हमेशा रहेगा। कोई भी हमें इससे विचलित नहीं कर सकता। ऐसी भावना समाज में फैलनी चाहिए।" राज्यपाल की यह टिप्पणी मंगलवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल में हुए छात्र प्रदर्शन के एक दिन बाद आई है। छात्र संगठनों ने वंदे मातरम से जुड़े कार्यक्रम में आरएसएस से जुड़े संगठन के राष्ट्रीय संयोजक जे नंदकुमार की मौजूदगी का विरोध किया था।
केरल छात्र संघ और मुस्लिम छात्र महासंघ समेत विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया था कि पंजीकरण कराने के बावजूद कई छात्रों को कार्यक्रम में प्रवेश नहीं दिया गया। वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
वंदे मातरम का विरोध या कुछ और... क्या है मामला?
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान कुछ छात्र घायल हुए थे। बुधवार को भी छात्रों का विरोध जारी रहा। राज्यपाल के परिसर से जाने के बाद प्रदर्शनकारी सभागार में दाखिल हुए और विश्वविद्यालय के एक शिक्षक के प्रस्तुतीकरण को बाधित किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षक पर परिसर में आरएसएस के एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
शिक्षक के बोलने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरएसएस के खिलाफ नारे लगाए और विरोध में अपने जूते ऊपर उठाए। इसके बाद वे सभागार के फर्श पर बैठ गए और नारेबाजी जारी रखी। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की।
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विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए आर्लेकर ने केंद्रीय विश्वविद्यालय से वंदे मातरम से जुड़े विषयों पर शोध करने का भी आग्रह किया।
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केरल के राज्यपाल बोले- मामला सिर्फ छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं
आर्लेकर ने कहा कि यह संस्थान की जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने मंगलवार को हुई घटनाओं को "अलग-थलग घटना नहीं" बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि इन घटनाओं के संबंध दूसरे संस्थानों और कार्यक्रमों से भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमें यह समझने की कोशिश करनी होगी कि आखिर यह क्या था।"
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उन्होंने कहा कि पूरे मामले को केवल छात्रों की ओर से वंदे मातरम के खिलाफ नारे लगाने तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह केवल कुछ छात्रों द्वारा वंदे मातरम के खिलाफ नारे लगाने तक सीमित नहीं है। हमें पता लगाना होगा कि इसके पीछे कौन है। केवल पता लगाना ही नहीं, बल्कि हमें कार्रवाई भी करनी होगी।"
कहां से आ रहे हैं ऐसे विचार, इसकी हो जांच : आर्लेकर
राज्यपाल ने सवाल उठाया कि इस तरह के विचार कहां से आ रहे हैं और कथित तौर पर उन्हें समाज में फैलाने की कोशिश कौन कर रहा है। उन्होंने कहा, "समस्या यह है कि ये विचार कहां से आ रहे हैं। इन्हें फैलाने की कोशिश कौन कर रहा है? कौन इस तरह की बातों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है? हमें इसकी जांच करनी होगी, इसे समझना होगा और पता लगाना होगा कि यह क्या है।"
आर्लेकर ने कहा, "यह केवल वंदे मातरम के खिलाफ नारे लगाने का मामला नहीं है। यह एक बड़ी साजिश है, जो अब हमारे समाज में प्रवेश कर चुकी है। हम सभी को बहुत सतर्क रहना होगा।" उन्होंने मंगलवार की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें केवल विश्वविद्यालय के पुस्तकालय सभागार की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि समाज में इस पर चर्चा होनी चाहिए।
केरल के केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रों ने किया था प्रदर्शन
राज्यपाल ने आरोप लगाया कि केवल वंदे मातरम ही नहीं, बल्कि व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशें भी की जा रही हैं। उन्होंने कहा, "वंदे मातरम हमारा गौरव है और हमेशा रहेगा। कोई भी हमें इससे विचलित नहीं कर सकता। ऐसी भावना समाज में फैलनी चाहिए।" राज्यपाल की यह टिप्पणी मंगलवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल में हुए छात्र प्रदर्शन के एक दिन बाद आई है। छात्र संगठनों ने वंदे मातरम से जुड़े कार्यक्रम में आरएसएस से जुड़े संगठन के राष्ट्रीय संयोजक जे नंदकुमार की मौजूदगी का विरोध किया था।
केरल छात्र संघ और मुस्लिम छात्र महासंघ समेत विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया था कि पंजीकरण कराने के बावजूद कई छात्रों को कार्यक्रम में प्रवेश नहीं दिया गया। वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
वंदे मातरम का विरोध या कुछ और... क्या है मामला?
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान कुछ छात्र घायल हुए थे। बुधवार को भी छात्रों का विरोध जारी रहा। राज्यपाल के परिसर से जाने के बाद प्रदर्शनकारी सभागार में दाखिल हुए और विश्वविद्यालय के एक शिक्षक के प्रस्तुतीकरण को बाधित किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षक पर परिसर में आरएसएस के एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
शिक्षक के बोलने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरएसएस के खिलाफ नारे लगाए और विरोध में अपने जूते ऊपर उठाए। इसके बाद वे सभागार के फर्श पर बैठ गए और नारेबाजी जारी रखी। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की।