अब सुप्रीम कोर्ट में तय होगा आपकी पहचान का 'आधार'
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भले ही केंद्र सरकार ने आधार बिल को लोकसभा में वित्त विधेयक के रूप में पास करवा लिया हो। पर इसकी असल अग्निपरीक्षा अभी सुप्रीम कोर्ट में होनी बाकी है। आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सरकार अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद ही यह तय हो पाएगा कि आधार कार्ड का वजूद क्या है। पढ़िए खास रिपोर्ट जिसमें आधार कार्ड के भूत से भविष्य तक की विस्तृत पड़ताल की गई है।
आधार योजना को संवैधानिक रूप देने के लिए केंद्र सरकार ने 11 मार्च, 2016 को लोकसभा में वित्त विधेयक के रूप में आधार बिल को पास करवा लिया। सरकार का मानना है कि इस बॉयोमेट्रिक आधारित योजना के चलते केंद्र की तरफ चल रही सामाजिक योजनाओं के साथ-साथ पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस देने की सुविधा को आसान बनाया जा सकेगा। सरकार ने जल्द से जल्द स्कीम को व्यापक रूप में लागू करने के लिए वित्त विधेयक का सहारा लिया। क्योंकि अगर आधार बिल ऐसे ही राज्यसभा में पारित होने के लिए जाता तो वहां विपक्ष का बहुमत होने के कारण इसे पारित करवाने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता। वोटिंग के समय यह बिल गिर जाता। इस बिल में संशोधन के लिए कांग्रेस के सांसद राजीव सातव और बीजेडी के सांसद तथागत सतपथी ने प्रस्ताव पेश किया। पर उनके इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से गिरा दिया गया। जब बिल लोकसभा में पास हुआ तब सदन में मात्र 73 सांसद मौजूद थे और कुल सांसदों की संख्या 545 है।
आधार बिल के वित्त विधेयक के रूप में पास हो जाने के बाद वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा "पूरे देश में 99 करोड़ लोगों ने आधार में अपना नामांकन करवा रखा है। देश के करीब 97 फीसदी लोगों के पास आधार कार्ड है। वहीं करीब 67 फीसदी बच्चों का भी पंजीकरण है। आधार कार्ड के जरिए पहले ही एलपीजी सब्सिडी में 15,000 करोड़ रुपए की बचत की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में चार राज्यों दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पुडुच्चेरी में आधार कार्ड के जरिए 2,346 करोड़ रुपए को बचाया जा सका है।
वहीं विपक्ष आधार कार्ड के जरिए लोगों की खुफिया निगरानी किए जाने के मुद्दे को उठा रहा है। विपक्ष का आधार कार्ड को लेकर डर है कि लोगों का बहुत अधिक संख्या में डाटा इस समय बाजार में है। सरकार को इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों की बॉयोमेट्रिक पहचान को बांटा नहीं जाएगा। साथ ही आधार कार्ड को पहचान के रूप में कितनी जगह प्रयोग किया जाएगा, इस बात को भी साफ करना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या करेगी सरकार?
वित्त विधेयक के रूप में आधार बिल को पास करवा कर लिया है। पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार अब क्या दलील देगी, इसे देखना होगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में अभी भी आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर बहस जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर, 2015 को अपने निर्णय देते हुए कहा था कि अभी आधार कार्ड को वॉलिटंरी रूप में सरकार प्रयोग कर सकती है। पर अभी इसको अनिवार्य नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी बताया था कि " किन-किन योजनाओं में अभी आधार कार्ड का प्रयोग किया जा सकता है"। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार कार्ड को मनरेगा, जन-धन योजना, पीएफ और पेंशन स्कीम के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
आधार कार्ड को भारत में लाने वाले और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण(यूडीआई) के पूर्व प्रमुख नंदन नीलेकणि ने कहा "यूपीए सरकार के समय शुरू की गई इस योजना के जरिए आज तीन करोड़ लोगों को एलपीजी कनेक्शन पर मिलने वाली सब्सिडी को ट्रांसफर किया जा रहा है। एनडीए सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपनी बुद्धिमानी का परिचय दिया है। अब यह निर्णय सब्सिडी के लिए प्रमुख पिलर का काम करेगा। एक बार कानूनी मामला सुलझ जाए तो बिजनेस क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए यह आधार कार्ड अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार का दावा, आधार कार्ड के जरिए बचाएगी हर साल 70 हजार करोड़ रुपए
मोदी सरकार का कहना है कि आधार कार्ड के प्रयोग के जरिए सामाजिक योजानाओं पर खर्च किए जाने वाले करोड़ों रुपए की हेराफेरी न हो, अब सरकार का इस बात पर पूरा जोर रहेगा। आधार की अनिवार्यता के जरिए सरकार हर साल 50,000 से 70,000 करोड़ रुपए के लीकेज को बचा सकेगी।
देश में अभी सामजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर सरकार करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए खर्च कर रही है। सरकार को भरोसा है कि अगले वित्त वर्ष से गरीबों को इस योजनाओं के जरिए पूरा लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। एक बार राष्ट्रपति इस बिल को मंजूरी दे देते हैं तो सरकार आधार कार्ड के प्रयोग को बैंकिंग, टैक्स और सर्विस क्षेत्र में प्रयोग की अनुमति दे देगी। साथ ही आधार कार्ड के लिए मोबाइल कनेक्शन भी लिए जा सकेंगे।
आधार कार्ड योजना को लागू करने पर 5,630 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च
20 जुलाई, 2015 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब देते हुए बताया था कि आधार कार्ड योजना को लागू करने पर 5,630 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किया जा चुका है। अब इस स्कीम को वापस नहीं लिया जा सकता है क्योंकि इसमें बहुत देर हो चुकी है।
कोर्ट में जवाब देते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि " देश की 120 करोड़ की आबादी में से 80 करोड़ लोगों के पास आधार कार्ड है।"
संसद में सरकार ने जवाब देते हुए कहा था कि " वर्ष 2009-2017 तक के लिए यूआईडी योजना के लिए 13,633.22 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। 28 फरवरी, 2015 तक इस योजना पर 5,630.48 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
नया बिल पेश होने के बाद आधार कानून में क्या होगा बदलाव?
नया बिल पेश होने के बाद आधार कानून में क्या होगा बदलाव?
-लोकसभा में आधार बिल पास होने के बाद अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि आधार कार्ड का प्रयोग अनिवार्य होगा या नहीं।
-पर अगर किसी सेवा का लाभ देने के लिए सेवा प्रदाता आपसे आधार कार्ड मांगता है तो आप उसे मना नहीं कर पाएंगे।
-विशेषज्ञ कहते हैं कि कानून में यह बात साफ है कि आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं किया जा सकता
-इस कानून में इस बात का प्रावधान भी नहीं है कि लोग इस योजना को अपनी मर्जी से चुन सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं।
क्या आधार कार्ड आपकी नागरिकता का प्रमाण पत्र है?
नहीं, आधार कार्ड सिर्फ पहचान के लिए प्रयोग किया जा सकता है। यह आपकी नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है।
क्या आपके आधार कार्ड के जरिए आपके बारे में ली गई सूचना गोपनीय रखी जाएगी?
आधार कार्ड के जरिए आपकी बॉयामेट्रिक पहचान को गोपनीय रखा जाएगा। सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा या कोर्ट के आदेश के बाद ही आपके डेटा को प्रयोग में लाया जा सकेगा।
आधार कार्ड की जानकारी गलत तरीके से देने पर सजा का क्या प्रावधान है?
आधार कार्ड के जरिए किसी की व्यक्तिगत जानकारी देने पर एक साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
पांच राज्य जहां सबसे ज्यादा लोगों के पास है आधार कार्ड
आबादी-------आधार कार्ड धारकों की संख्या
दिल्ली---1.93 करोड़-----1.77 करोड़
पंजाब---2.93 करोड़-----2.80 करोड़
आंध्र प्रदेश----5.22 करोड़----4.97 करोड़
हरियाणा-2.68 करोड़------2.58 करोड़
तेलंगाना-3.73 करोड़-----3.72 करोड़
भारत में हर दिन बन रहे हैं 5 से 7 लाख नए आधार कार्ड
किन देशों में और किस रूप में होता ऐसे कार्ड का प्रयोग
अमेरिका ने अपने देश में रहने वाले लोगों को नौ अंकों का सोशल सिक्योरिटी नंबर जारी किया है। इसकी मदद से वो अपने देश के नागरिकों की पहचान करता है। पहले इसे सोशल सिक्योरिटी नंबर कहा जाता था। अब इसे नेशनल आइडेंटिटी के रूप में जाना जाता है।
चीन अपने नागरिकों को 18 अंकों वाला आइडेंटिटी नंबर वाला पहचान पत्र जारी करता है। यह आईडी 16 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए जारी किया जाता है।
पाकिस्तान अपने नागरिकों को वर्ष 2001 से ही नेशनल आइडेंटिटी नंबर जारी कर रहा है। यह बॉयोमेट्रिक पहचान पत्र 13 अंकों का होता है।