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पाबंदी की तैयारी: भारत में अब ऑनलाइन गेम खेलना नहीं होगा आसान, खेलने से पहले यूजर्स को करवाना होगा केवाईसी
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अमर उजाला
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देश में बच्चों और युवाओं में बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग के क्रेज और इसमें दांव पर लगने वाली भारी रकम को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार अब सतर्क हो गई है। सरकार को इस बात डर सता रहा है कि ऑनलाइन गेमिंग का इस्तेमाल काले धन को सफेद बनाने में किया जा सकता है। साथ ही गेमिंग के जरिए कमाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भी हो सकता है।
इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग और इससे जुड़ी गतिविधियों को धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) की जद में ला सकती है। अगर गेमिंग कंपनियां धन शोधन निरोधक कानून के दायरे में आती हैं तो उन्हें खेलने वालों से पहले नो योर कस्टमर (केवाईसी) जमा करने के लिए बाध्य करना होगा। इसके बाद ही लोग आसानी से गेम खेल सकेंगे।
गेमिंग में दांव लगाने वालों का पहचान पत्र उपलब्ध नहीं
इंडिया मोबाइल गेमिंग रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत के टॉप-30 छोटे शहरों में 2020 की तुलना में ऑनलाइन गेम खेलने वाले लोगों की तादाद में 170 फीसदी तेजी आई है। कुछ छोटे शहरों में तो ऐसे लोगों की संख्या में 100 से 200 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। आनलाइन गेमिंग मामलों के जानकारों का कहना है कि दरअसल सरकार को गेमिंग कंपनियों को पीएमएलए के दायरे में लाने की जरूरत तब महसूस हुई, जब जांच एजेंसियां रकम के आदान-प्रदान का पता नहीं लगा सकीं। क्योंकि इसकी एक ही वजह थी कि जो ग्राहक ऑनलाइन गेमिंग में दांव लगा रहे थे, उनके बारे में जानकारी और उनके आधिकारिक पहचान पत्र उपलब्ध ही नहीं थे। इन गेमिंग ऐप्लिकेशन के जरिए लाखों रुपये की रकम की हेराफेरी हुई है मगर इसमें लिप्त लोगों की जानकारी गेमिंग कंपनियों के पास नहीं थी।
केवाईसी अनिवार्य करने के अलावा गेमिंग ऐप को पीएमएलए में लाने का एक मतलब यह भी होगा कि इन कंपनियों को अलग से एक निदेशक और एक मुख्य अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। पीएमएलए के तहत गेमिंग कंपनियों को रिपोर्टिंग इकाई (आरई) का दर्जा दिए जाने से इन इकाइयों को रकम भेजने वालों और पाने वालों की जानकारी एवं अन्य संबंधित विवरण वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) को देना होगा। इसके अलावा गेमिंग कंपनियों को 50,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भी कहा जा सकता है।
इस मामले में वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि गेमिंग कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, जो चिंता की बात है। वैसे तो गेमिंग कंपनियां कंपनी मामलों के मंत्रालय में पंजीकृत हैं मगर इनमें विदेशी निवेश पर कोई रोक नहीं है। विश्वस्त सूत्रों ने कहा कि इनमें कुछ कंपनियां माल्टा में पंजीकृत हैं। वित्तीय उपाय कार्य बल (एफएटीएफ) ने माल्टा को उन देशों में शुमार किया है, जहाँ वित्तीय नियमन दुरुस्त नहीं हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो माल्टा एफएटीएफ की ‘ग्रे’ सूची में आता है।