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रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी, अब आठ की जगह होंगे अध्यक्ष समेत पांच सदस्य
Wed, 25 Dec 2019 03:14 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Wed, 25 Dec 2019 03:14 AM IST
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केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को रेलवे बोर्ड पुनर्गठन को मंजूरी दी, जिसमें अब आठ की जगह अध्यक्ष सहित पांच सदस्य होंगे। साथ ही रेलवे के विभिन्न कैडर का विलय कर सिंगल रेलवे मैनेजमेंट सिस्टम में बदलने को भी मंजूरी दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। अब रेलवे बोर्ड में ट्रैफिक, रोलिंग स्टॉक, ट्रैक्शन और इंजीनियरिंग की जगह परिचालन, व्यवसाय विकास, मानव संसाधन, बुनियादी ढांचा और वित्त के लिए सदस्य होंगे।
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रेलवे में विभिन्न सेवाओं के लिए अब एक ही कैडर भारतीय रेलवे सेवा होगा। इससे पहले, रेलवे में कुल आठ कैडर होते थे, जिसमें मेकेनिकल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, स्टोर, पर्सनल, सिग्निलिंग, ट्रैफिक व सिविल इंजीनियर शामिल थे। बैठक के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया, रेलवे बोर्ड का पुनर्गठन एक ऐतिहासिक फैसला है। रेलवे बोर्ड का पुनर्गठन विभागों की जटिलताओं से राहत दिलाएगा।
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इस फैसले से जहां रेलवे की कार्य प्रणाली बेहतर होगी, वहीं तर्कसंगत तरीके से निर्णय लिए जा सकेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें किसी की वरीयता से समझौता नहीं किया जाएगा। रेलवे में दो विभाग रेलवे सुरक्षा बल और चिकित्सा विभाग होंगे। बाकी विभाग रेलवे मैनेजमेंट सिस्टम के तहत आएंगे। कैबिनेट ने भारतीय रेलवे चिकित्सा सेवा का नाम बदलकर भारतीय रेलवे स्वास्थ्य सेवा कर दिया है।
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बोर्ड चेयरमैन को मिलेंगे ज्यादा अधिकार
रेलवे बोर्ड अध्यक्ष के पद को अब और मजबूत बनाया गया है। बोर्ड का गठन विभागीय तर्ज पर नहीं होगा। बोर्ड एक छोटे आकार वाली संरचना होगी, जिसमें एक चेयरमैन होंगे, जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर भी काम करेंगे। चेयरमैन मानव संसाधन के प्रति जवाबदेह होंगे, जिन्हें एक डीजी (एचआर) सहायता प्रदान करेगा। गौरतलब है कि भारतीय रेलवे पर बनी विवेक देबराय समिति ने 2015 में सौंपी अपनी रिपोर्ट में रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की सिफारिश की थी।
शस्त्र विधेयक में संशोधनों को मंजूरी
नई दिल्ली। कैबिनेट ने मंगलवार को शस्त्र (संशोधन) विधेयक, 2019 में आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी दे दी। लोकसभा ने नौ दिसंबर को विधेयक को पारित कर दिया था। विधेयक में लाइसेंसी हथियार रखने की संख्या सीमित की गई है और अवैध हथियार रखने, बेचने और बनाने पर उम्रकैद का प्रावधान किया गया है। संशोधित विधेयक में त्योहार, शादी विवाह के मौकों पर हर्ष फायरिंग करने पर जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। शस्त्र कानून में मंजूर किए गए संशोधन इलेक्ट्रॉनिक लाइसेंस उपलब्ध कराने, लाइसेंस को लंबी वैधता अवधि देने और दंड के कठिन प्रावधानों का प्रस्ताव करते हुए हथियारों के अवैध कब्जे को रोकने को कठोर व्यवस्था बनाने की दिशा में अगला कदम है।
आतंकवाद से साथ मिलकर निपटेंगे भारत और उज्बेकिस्तान
केंद्रीय कैबिनेट ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध व आतंकवाद से निपटने को लेकर भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हुए सहयोग समझौते को मंजूरी दी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उज्बेकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री ने 20 नवंबर को करार पर हस्ताक्षर किए थे। इसके साथ ही, बांग्लादेश के साथ युवा मामलों में सहयोग को लेकर एमओयू को और सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग पर करार को मंजूरी दी।