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कश्मीरी छात्रों को मिल रही धमकियों पर केंद्र व 10 राज्यों को नोटिस

Sat, 23 Feb 2019 01:34 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sat, 23 Feb 2019 01:34 AM IST
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Notice to Center and 10 states on threats to Kashmiri students
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 10 राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और दिल्ली के पुलिसआयुक्त को पुलवामा आतंकी हमले के बाद कथित तौर पर कश्मीरी छात्रों को मिल रही धमकियों और मारने-पिटने की घटना पर फौरन कार्रवाई करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा गया कि जहां कश्मीरी छात्रों का सामाजिक बहिष्कार हो रहा है, वहां भी तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। 
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चीफ जस्टिस रंजन गोगई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने वकील तारिक अदीब द्वारा दायर इस याचिका पर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र आदि राज्यों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा है कि मॉब लिंचिंग मामले में गत वर्ष 14 जुलाई को शीर्ष अदालत केफैसले के अनुरूप नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी ही कश्मीरी छात्रों या अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाली हिंसा की घटनाओं को रोकने का काम करेंगे।
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पीठ ने यह भी कहा कि सभी राज्यों में इसका व्यापक प्रचार किया जाना चाहिए जिससे कि धमकी, सामाजिक बहिष्कार आदि की जानकारी मिलने पर कार्रवाई की जा सके। अगर इस संबंध में एडवाइजरी जारी कर दिया गया है तो भी इसे समय-समय पर जारी किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यह मानवीय समस्या है। केंद्र सरकार इस संबंध में पहले ही कदम उठा चुकी है। सभी राज्यों में नोडल अधिकारी पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं। 
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एडवाइजरी भी जारी की जा चुकी है। टेलीफोन नंबर भी दिए जा चुके हैं। ऐसा इस बात को ध्यान में रखते हुए किया गया था कि कश्मीरी छात्र खुद को असुरक्षित समझते हैं। गत 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले से काफभ् पहले ही नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि वृहस्पतिवार को इंटेलिजेंस सचिव से उनकी मुलाकात हुई थी और उन्होंने बताया था कि वह सभी राज्यों के पुलिस महानिदेश के संपर्क में है। 


इससे पहले सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि पिछले दो दिनों में पंजाब व महाराष्ट्र से दो नई घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मॉब लिंचिंग मामले में आदेश पारित किया गया था, वैसा ही आदेश इस मामले में पारित किया जाना चाहिए। अगली सुनवाई बुधवार को होगी।
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