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मासिक धर्म के दौरान सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल न करने से बढ़ सकता है संक्रमण
Sun, 16 Aug 2020 08:49 PM IST
गौरव पाण्डेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 16 Aug 2020 08:49 PM IST
सार
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले के भाषण में सैनिटरी पैड्स की चर्चा को विशेषज्ञ प्रगतिशील कदम के रूप में देख रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
लाल किले से दिए भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैनिटरी पैड्स की चर्चा कर महिलाओं का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर इसका खूब स्वागत किया जा रहा है और इसे मासिक धर्म से जुड़े एक टैबू को पीछे छोड़ने वाले प्रगतिशील कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे इस संदर्भ में समाज में जागरूकता आएगी। डॉक्टरों का कहना है कि सुरक्षित सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल न करने से महिलाओं में संक्रमण फैल सकता है। यहां तक कि यह संक्रमण कई बार इतना गंभीर भी हो सकता है कि इसके कारण महिला को गर्भ धारण करने में भी समस्या आ सकती है।
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मेट्रो अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynaecologist) डॉ. अंजू सूर्यपाणी ने अमर उजाला से कहा कि महिलाओं के लिए मासिक धर्म का समय बेहद संवेदनशील होता है। अगर किन्हीं कारणों से महिला इस दौरान अच्छे सैनिटरी पैड्स या किसी सुरक्षित विकल्प का इस्तेमाल नहीं करती है तो इससे उसके स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। मासिक धर्म के दौरान सुरक्षा पर ध्यान न देने से महिलाओं की योनि और गर्भाशय नलिका में संक्रमण होने की संभावना हो सकती है। गर्भाशय नलिका में संक्रमण ज्यादा बढ़ जाने से भविष्य में महिला को गर्भ धारण में भी समस्या आ सकती है।
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आज बाजार में कई अच्छे तरह के सैनिटरी पैड्स आते हैं। इनकी कीमत एक रुपये से लेकर डेढ़ सौ रुपये तक हो सकती है। लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि सैनिटरी पैड्स के नाम पर किसी बड़े ब्रांड के महंगे सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल ही किया जाए। इसके लिए साफ-सुथरा सूती कपड़ा या कॉटन भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आवश्यकतानुसार इसे समय-समय पर बदलते रहना चाहिए।
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बाज़ार में उपलब्ध कई पैड्स नायलॉन या प्लास्टिक से बने होने के कारण सस्ते हो सकते हैं, लेकिन ये स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए पैड्स खरीदते समय इनके बनावट में इस्तेमाल की गई वस्तुओं का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है जो इनके पैकेट पर अंकित होता है।
महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ने के कारण अब वे इन उत्पादों की खरीद के समय इन पहलुओं पर भी विचार करती हैं। यही कारण है कि आज बहुत सी कंपनियां सैनिटरी पैड्स बनाने में फ्रूट जेली, केले के पत्ते के रेशे या अन्य ऑर्गेनिक पदार्थों का इस्तेमाल करती हैं। ये पैड्स न सिर्फ इस्तेमाल में आरामदायक होते हैं, बल्कि इनको नष्ट करना (डीकंपोज करना) भी आसान होता है। यही कारण है कि आजकल इस तरह के पैड्स ज्यादा चलन में हैं।