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Rabies: कुत्ते को रेबीज का टीका लगा या नहीं, पता लगाना आसान नहीं; इंजेक्शन के बाद टैगिंग जरूरी

Sat, 23 Aug 2025 07:27 AM IST
दीपक कुमार शर्मा परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 23 Aug 2025 07:27 AM IST
सार

भारत में लावारिस कुत्तों की अनुमानित संख्या करोड़ों में है और उन्हें पकड़कर टीका लगाना सबसे बड़ी चुनौती...पहली बार 15 दिन के अंतराल में दो टीके, फिर आजीवन हर साल लगता है रेबीज का इंजेक्शन...टीके के बाद टैगिंग जरूरी

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not easy to find out whether dog vaccinated against rabies or not tagging necessary after injection
लावारिस कुत्ते - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

रेबीज नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने लावारिस कुत्तों के टीकाकरण पर जोर दिया है, पर देश में अभी ऐसा कोई व्यवस्थित तरीका नहीं है, जिससे पता लगाया जा सके कि किसी कुत्ते को रेबीज का टीका लगा है या नहीं? कौन सा कुत्ता रेबीज संक्रमित है और टीकाकरण के बाद अगर उसे छोड़ते हैं, तो अगले वर्ष टीका लगाने के लिए उसे कैसे तलाशा जाएगा? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब तंत्र के पास नहीं है।

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भारतीय पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. उमेश शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि भारत में लावारिस कुत्तों की अनुमानित संख्या करोड़ों में है और उन्हें पकड़कर टीका लगाना ही बड़ी चुनौती है। यह पहचानना कि किस कुत्ते को पहले टीका लग चुका है, लगभग असंभव है। डॉ. शर्मा के अनुसार, जब भी किसी कुत्ते को रेबीज का टीका दिया जाता है, तो 15 दिन के अंतराल में दो खुराक देनी पड़ती है। यह एंटीबॉडी 12 महीने तक मौजूद रहती है। उस कुत्ते को अगले साल फिर से टीका लगाना होगा। यह टीकाकरण हर साल होगा।
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टैगिंग का अभाव... राष्ट्रीय स्तर पर बनानी होगी एकसमान व्यवस्था
पशु चिकित्सकों के मुताबिक, भारत में टीका लगे लावारिस कुत्तों की कोई यूनिवर्सल टैगिंग व्यवस्था नहीं है। कुछ नगर निगमों ने गले में रंगीन कॉलर या पेंट मार्किंग का प्रयोग किया है, लेकिन यह अस्थायी है और जल्द मिट जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे पालतू कुत्तों के लिए माइक्रोचिपिंग या स्थायी टैगिंग होती है, वैसे ही राष्ट्रीय स्तर पर एक समान टैगिंग व्यवस्था विकसित करनी होगी।
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ट्रैकिंग स्पष्ट नहीं रही, तो असर अधूरा
रेबीज हर साल भारत में हजारों लोगों की जान लेता है। सबसे अधिक शिकार गरीब तबके के लोग बनते हैं, जिन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं समय पर नहीं मिल पातीं। अगर टीकाकरण की गिनती और ट्रैकिंग ही अस्पष्ट रही, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर अधूरा रहेगा। -डॉ. विनोद कुमार, पशु चिकित्सालय, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत रेबीज मुक्त होना चाहता है, तो हर  टीकाकरण अभियान के साथ कुत्तों की टैगिंग अनिवार्य होनी चाहिए। डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बनाने के साथ पालतू और आवारा सभी कुत्तों के लिए राष्ट्रीय रेबीज डाटाबेस तैयार होना चाहिए।

राजनेता और पशु प्रेमी खुश मेनका बोलीं- सही फैसला
सुप्रीम कोर्ट के संशोधित आदेश का समाज के विभिन्न वर्गों ने स्वागत किया और इसे वैज्ञानिक व प्रगतिशील बताया है। वहीं, कुछ लोगों ने इसे संतुलित फैसला बताया। शीर्ष अदालत ने कहा, अब कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें उठाया गया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोर्ट के आदेश का स्वागत
करते हुए कहा कि यह जानवरों के कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में प्रगतिशील कदम है। यह दृष्टिकोण दयालु होने के साथ वैज्ञानिक तर्क पर आधारित है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा, मैं इस वैज्ञानिक फैसले से बहुत खुश हूं। कुत्तों को उठाकर, उनकी नसबंदी करके उन्हें कहीं और छोड़ देने की पुरानी प्रथा से न तो उनकी आबादी कम हुई और न ही कुत्तों के काटने के मामले। नसबंदी के बाद उन्हें उनके क्षेत्र में लौटाना ही सही समाधान है।

संतुलित आदेश : याचिकाकर्ता
सुप्रीम कोर्ट में वकील और याचिकाकर्ता ननिता शर्मा ने कहा, यह संतुलित आदेश है। कोर्ट ने सभी राज्यों को शामिल किया है। सभी मामले शीर्ष अदालत में लाए जाएंगे। कुत्तों को नसबंदी और आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में रखा जाएगा। एमसीडी को निश्चित भोजन स्थल बनाने का निर्देश भी दिया गया है। मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकुंज शर्मा ने कहा, यह निर्णय लावारिस कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने और सुरक्षित वातावरण बनाने में मदद करेगा।

कोर्ट ने अपना अमानवीय आदेश सुधारा : चतुर्वेदी
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, पिछला आदेश अमानवीय और मानवीय कारणों के खिलाफ था। यह आवश्यक है, कुत्तों का नसबंदी, टीकाकरण हो और निश्चित भोजन स्थल हों। सुप्रीम कोर्ट ने गलत निर्णय को सही किया है।


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विश्वास था, निर्णय पक्ष में ही आएगा : सोनाली गाबा
पशु प्रेमी सोनाली गाबा ने कहा, हमने विश्वास रखा कि सुप्रीम कोर्ट हमारे पक्ष में निर्णय देगा। आदेश से लावारिस कुत्तों को राहत मिली है। आक्रामक कुत्तों को अलग रखा जाएगा और यदि उनमें रैबीज नहीं है, तो उन्हें तुरंत छोड़ा जाएगा। हम निश्चित भोजन स्थल बनाएंगे। कुत्तों को गोद लेने का निर्णय हमारे लिए बड़ी राहत है।

एमसीडी ने अपना काम सही समय पर नहीं किया : भारद्वाज
आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभभारद्वाज ने कहा, एमसीडी ने कुत्तों का टीकाकरण समय पर नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नगर निगम जिम्मेदार है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और मेयर, दोनों बीजेपी से हैं, उन्हें इस पर काम करना होगा।

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