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पूरी दुनिया ने माना बापू के अहिंसावादी विचार का लोहा
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 02 Oct 2016 06:10 PM IST
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसावादी फार्मूले का लोहा पूरी दुनिया मानती है। इसी फार्मूले पर चलते हुए हिंदुस्तान से ब्रिटिश सेना को वापस जाना पड़ा और हिंदुस्तान अहिंसा की राह पर चलते हुए आजाद हुआ।
गांधीजी के विचारों से न केवल भारतीय प्रभावित हैं, बल्कि मार्टिल लूथर किंग से लेकर नेल्सन मंडेला तक उन्ही की राह पर चलते हुए अपने-अपने देशों में अहिंसा को लाने में कामयाब रहे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर नेल्सन मंडेला ने भी दक्षिण अफ्रीका के मूल निवासियों को वहां के गोरे शासकों की जंजीरों से मुक्त कराया था। उसी तरह अमरीका के डाक्टर मार्टिन लूथर किंग ‘जूनियर ने गांधी की अहिंसक रणनीति को अपनाकर वहां के काले लोगों को नागरिकता के वे सब अधिकार दिलाये थे, जो उन्हें प्राप्त नहीं थे।
यूरोप के अनेक देशों के अनेक चिंतकों ने यह महसूस किया है कि शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलकर ही इंसान सुकून का जीवन जी सकता है। यही नहीं इस तथ्य को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने भारत प्रवास के दौरान स्वीकारा।
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उन्होंने बार-बार कहा कि मैं दो महान व्यक्तियों से प्रभावित हूं-एक महात्मा गांधी और दूसरे अमेरिका के डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र ने भी 2007 में गांधीजी के अहिंसावादी विचार का लोहा मानते हुए दो अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाना शुरू कर दिया है।
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गांधीजी के विचारों से न केवल भारतीय प्रभावित हैं, बल्कि मार्टिल लूथर किंग से लेकर नेल्सन मंडेला तक उन्ही की राह पर चलते हुए अपने-अपने देशों में अहिंसा को लाने में कामयाब रहे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर नेल्सन मंडेला ने भी दक्षिण अफ्रीका के मूल निवासियों को वहां के गोरे शासकों की जंजीरों से मुक्त कराया था। उसी तरह अमरीका के डाक्टर मार्टिन लूथर किंग ‘जूनियर ने गांधी की अहिंसक रणनीति को अपनाकर वहां के काले लोगों को नागरिकता के वे सब अधिकार दिलाये थे, जो उन्हें प्राप्त नहीं थे।
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यूरोप के अनेक देशों के अनेक चिंतकों ने यह महसूस किया है कि शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलकर ही इंसान सुकून का जीवन जी सकता है। यही नहीं इस तथ्य को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने भारत प्रवास के दौरान स्वीकारा।
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उन्होंने बार-बार कहा कि मैं दो महान व्यक्तियों से प्रभावित हूं-एक महात्मा गांधी और दूसरे अमेरिका के डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र ने भी 2007 में गांधीजी के अहिंसावादी विचार का लोहा मानते हुए दो अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाना शुरू कर दिया है।