फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

नोबेल पुरस्कार पाना जितना मुश्किल है खोना उतना ही आसान, बताती हैं ये घटनाएं

Mon, 01 Oct 2018 03:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 01 Oct 2018 03:09 PM IST
विज्ञापन
Nobel prizes gone missing in spectacular ways

दुनियाभर में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। लेकिन कई लोगों के नोबेल पुरस्कार बेहद अजीब तरीके से खोए भी हैं। बीते 100 सालों का इतिहास देखें तो किसी ने प्रेमिकाओं को खुश करने के लिए मेडल की तस्करी की तो किसी ने नाजियों से बचने के लिए खत्म कर दिया। चलिए बताते हैं आपको ऐसे ही लोगों के बारे में-

loader

नोबेल प्राइज मेडल चोरी होना

Nobel prizes gone missing in spectacular ways
बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी को साल 2014 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन साल 2017 में उनका मेडल उनके दिल्ली स्थित घर से चोरी हो गया। लेकिन वह केवल मेडल की प्रतिकृति थी। असली मेडल तो म्यूजियम में प्रदर्शन के लिए रखा गया है।

फ्रांस के राजनेता एरिस टाइड ब्रेंड्स का मेडल फ्रांस के हेरिटेज म्यूजियम में रखा गया था। उनका मेडल साल 2015 में चोरी हो गया। और अभी तक मेडल को बरामद भी नहीं किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जब्त कर लिए गए

Nobel prizes gone missing in spectacular ways
ईरान की अधिकार कार्यकर्ता शिरीन एबादी ने साल 2009 में आरोप लगाया कि उन्हें 2003 में जो नोबेल प्राइज मिला था उसे तेहरान ने जब्त कर लिया है। क्योंकि उन्होंने टैक्स नहीं भरा था। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात की आलोचना हुई तो एबादी को उनका मेडल वापस मिल गया।

तेजाब में खत्म कर दिया

Nobel prizes gone missing in spectacular ways
जर्मनी के नोबेल पुरस्कार विजेता मैक्स वॉन लोई और जेम्स फ्रैंको के मेडल भी तेजाब के माध्यम से खत्म किए गए। दरअसल मैक्स यहूदी थे और जेम्स यहूदियों के शुभचिंतक। दोनों ने सुरक्षा के लिए अपने मेडल कोपनहेगन में रहने वाले भौतिक वैज्ञानी नील्स बोहर को दे दिए। हिटलर की जर्मनी से सोने को बाहर ले जाना गैरकानूनी था।

जब नाजियों ने साल 1940 में डेनमार्क पर आक्रमण किया तो बोहर्स इंस्टीट्यूट के केमिस्ट जॉर्ज डी हैवे ने 23 कैरट के दो गोल्ड मेडल को एसिड में डालकर खत्म कर दिया। लेकिन बाद में उन्होंने एक तरीका अपनाकर साल 1950 में सोना वापस प्राप्त कर लिया।
विज्ञापन

सोने पर युद्ध

Nobel prizes gone missing in spectacular ways
साल 1975 में रूस के नोबेल इकोनोमिस्ट पुरस्कार विजेता लिओनिड कांतरोविच और अमेरिका के तजालिंग कूमन्स के मेडल आपस में बदल गए। जिसका कारण था दोनों देशों के बीच चल रहा शीत युद्ध। चार सालों के राजनयिक प्रयासों के बाद दोनों को अपने मेडल मिल सके।
विज्ञापन
अगली फोटो गैलरी देखें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Followed