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अमर्त्य सेन की दो टूक : बोले- बंगाल को एकता चाहिए, विभाजन नहीं, उनका रिकॉर्ड 'बेहद खराब'

Mon, 19 Apr 2021 08:25 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 19 Apr 2021 08:25 PM IST
सार

अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों की सराहना की, खासतौर पर लड़कियों के लिए चलाए गए कार्यक्रम, ग्रामीण ढांचे के विस्तार और खाद्य सुरक्षा के आश्वासन के लिए भी सरकार की सराहना की, लेकिन उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार के मुद्दे से निपटने पर जोर दिया।

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Nobel Prize Winner Amartya Sen said West Bengal should not give its reins in the hands of central leaders
प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमृत्य सेन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

पश्चिम बंगाल को अपनी बागडोर स्थानीय नेताओं के बजाए केंद्रीय नेताओं को सौंप कर 'राष्ट्रीय पतन' का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। क्योंकि इससे उन हाथों में सत्ता की पकड़ मजबूत होगी जिनका आर्थिक नीतियों और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में रिकॉर्ड 'बेहद खराब' है। यह बात नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन ने एक साक्षात्कार में कही।

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सेन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों की सराहना की, खासतौर पर लड़कियों के लिए चलाए गए कार्यक्रम, ग्रामीण ढांचे के विस्तार और खाद्य सुरक्षा के आश्वासन के लिए भी सरकार की सराहना की, लेकिन उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार के मुद्दे से निपटने पर जोर दिया।
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उन्होंने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में इस बात पर अफसोस जताया कि पहचान की राजनीति ने बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में अपना सिर उठा लिया है और उन्होंने सांप्रदायिक विभेद के लिए हिंदुत्व के ध्वजवाहकों को जिम्मेदार ठहराया।
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सेन ने कहा कि अगर बंगाल में स्थानीय नेताओं के बजाए केंद्रीय नेताओं का शासन आता है तो इससे भारत में उन हाथों में सत्ता की पकड़ और मजबूत होगी, जिनकी अल्पसंख्यकों के अधिकारों की अवधारणा बेहद सीमित है और जिनका आर्थिक नीतियों और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में रिकॉर्ड 'बेहद दोषपूर्ण' है।


उन्होंने जोर देकर यह भी कहा कि बंगाल को एकता चाहिए, विभाजन नहीं। राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए 'बाहरी-भीतरी' के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह वास्तव में बहुत खराब बात है, क्योंकि बाहरियों के लिए सहिष्णुता रखना बंगाल का इतिहास रहा है।

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