Tamil Nadu: द्रमुक नेता को हाईकोर्ट से झटका, याचिका खारिज; कहा- पलानीस्वामी के खिलाफ जांच का कोई कारण नहीं
Tamil Nadu: न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने द्रमुक नेता भारती की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि 2021 में तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार नए सिरे से प्रारंभिक जांच का कोई कारण नहीं है।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को द्रमुक नेता आरएस भारती की उस याचिका को खारिज कर दिया जो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी के खिलाफ दायर की थी। भारती ने आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती अन्नाद्रमुक शासन के दौरान कई करोड़ रुपये के राजमार्ग निविदा में अनियमितता हुई।
अदालत ने द्रमुक के संगठन सचिव भारती को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसमें सतर्कता विभाग को मामले की जांच करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने भारती की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि 2021 में तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार नए सिरे से प्रारंभिक जांच का कोई कारण नहीं है।
भारती की याचिका पर उच्च न्यायालय ने 2018 में मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया था। लेकिन राज्य सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई करने के लिए उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया। जब उच्च न्यायालय ने याचिका को सुनवाई के लिए लिया, तो राज्य सरकार द्वारा यह प्रस्तुत किया गया कि इस मामले में नए सिरे से जांच की जाएगी। इसके बाद भारती अपनी याचिका वापस लेना चाहते थे।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि जिस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए, वह यह है कि नए सिरे से प्रारंभिक जांच का आदेश देने के पीछे क्या कारण है। जांच रिपोर्ट 28 अगस्त, 2018 को सौंपी गई थी। सतर्कता और भ्रष्टाचार रोधी निदेशालय (डीवीएसी) ने इसे स्वीकार कर लिया था और यही कारण था कि भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी ने इस अदालत द्वारा पारित पहले के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील दायर की थी।
उच्च न्यायालय ने कहा, इस अदालत के समक्ष जो संवाद पेश किए गए हैं, उनसे यह संकेत नहीं मिलता है कि (हाल ही में) नए सिरे से प्रारंभिक जांच का आदेश क्यों दिया गया है। या तो डीवीएसी को कुछ नए तथ्यों/सामग्रियों का पता लगाना चाहिए था या 28 अगस्त, 2018 की पूर्व प्रारंभिक जांच रिपोर्ट खराब पाई जानी चाहिए थी। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई कारण बताए बिना सरकार ने सीधे नए सिरे से प्रारंभिक जांच का आदेश दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि इस अवधि के दौरान जो एकमात्र घटनाक्रम हुआ, वह यह था कि सत्ता में बदलाव हुआ और द्रमुक ने विधानसभा चुनाव जीता और सात मई, 2021 को सरकार बनाई। उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि डीवीएसी राज्य के कार्यकारी अंग से संबंधित एक स्वतंत्र निकाय है। इसलिए, यदि वह पहले प्रस्तुत प्रारंभिक जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थी, तो नए सिरे से प्रारंभिक जांच का आदेश देने के बजाय इसे स्वीकार न करके तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
न्यायाधीश ने कहा कि डीवीएसी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा और वह जांच अधिकारी द्वारा दायर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट से संतुष्ट था। यही कारण है कि डीवीएसी ने 2018 में स्वतंत्र रूप से शीर्ष अदालत के समक्ष अपील दायर की। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों में कोई बदलाव किए बिना, वर्ष 2021 में सत्ता परिवर्तन को छोड़कर, सरकार अब पहले की रिपोर्ट की अवहेलना करके नए सिरे से प्रारंभिक जांच का निर्देश नहीं दे सकती है, जिसे वास्तव में डीवीएसी और तत्कालीन सरकार (अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाली) ने स्वीकार किया था।
उन्होंने आगे कहा, कानून की नजर में केवल एक राज्य सरकार थी और यह मायने नहीं रखता था कि कौन सा राजनीतिक दल सत्ता संभालता है। इसलिए, सभी उद्देश्यों के लिए सरकार द्वारा लिया गया निर्णय बरकरार रहना चाहिए और इसे बिना किसी वैध कारण के बदला नहीं जा सकता है, खासकर नेतृत्व परिवर्तन के लिए।