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Politics: CM हिमंत बिस्व सरमा के स्वदेशी वाले बयान पर भड़के ओवैसी, बोले- वफादारी का सबूत मांगने वाला कोई नहीं
Mon, 25 Mar 2024 09:44 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Mon, 25 Mar 2024 09:44 PM IST
सार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की टिप्पणी पर असदद्दुीन ओवैसी भड़क गए। उन्होंने कहा कि हमें वफादारी साबित करने की जरूरत नहीं है। सीएम सरमा का बयान कट्टरता और नस्लवाद का सिर्फ एक उदाहरण का है।
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हिमंत बिस्व सरमा-असदद्दुीन ओवैसी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की स्वदेशी वाले बयान पर असदद्दुीन ओवैसी आगबबूला हो गए। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हमारी वफादारी का लगातार सबूत मांगने वाले कोई नहीं है। सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि बंगाली भाषी मुसलमान पहले से ही भारत के लिए स्वदेशी ही हैं। सोशल मीडिया पोस्ट पर असदद्दुीन ओवैसी ने लिखा कि वफादारी का लगातार सबूत देने की जरूरत नहीं है। सीएम सरमा का बयान कट्टरता और नस्लवाद का सिर्फ एक उदाहरण का है।
हमें किसी से दिक्कत नहीं, मानने होंगे कुछ रिवाज- सरमा
स्वदेशी की तरह व्यवहार करने के लिए असमिया संस्कृति का पालन करने के लिए कहते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि मैंने अप्रवासी मुस्लिम लोगों से हमेशा कहा है कि उनकी सरकार को स्वदेशी होने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें दो या तीन बार शादी नहीं करनी चाहिए। यह असमिया लोगों का रिवाज नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपको 11-12 साल की लड़कियों को शादी करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। आपको अपने बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहिए, न कि मदरसे में। स्वदेशी होने के लिए, किसी को यहां की संस्कृति को स्वीकार करना होगा।
'मैं सभी का सम्मान करता हूं, बस कुछ चीजों पर दिक्कतें हैं'
सरमा ने कहा कि असमिया हिंदू, असमिया मुस्लिम- चाहे वे शंकरदेव का अनुसरण करें या नहीं, वे सभी का सम्मान करते हैं। जम्मू कश्मीर के बाद असम में मुसलमानों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। गौरतलब है कि असम कैबिनेट ने 1935 के 'असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम' को रद्द कर दिया था।
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गौरतलब है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि उनकी सरकार को किसी के खुद को स्वदेशी कहने से कोई समस्या नहीं है, जब तक वे बाल विवाह पर रोक लगाते हैं, बहुविवाह में शामिल नहीं होते और अपने बच्चो को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ये सभी पैरामीटर जो बड़े असमिया समाज का आंतरिक हिस्सा है।
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हमें किसी से दिक्कत नहीं, मानने होंगे कुछ रिवाज- सरमा
स्वदेशी की तरह व्यवहार करने के लिए असमिया संस्कृति का पालन करने के लिए कहते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि मैंने अप्रवासी मुस्लिम लोगों से हमेशा कहा है कि उनकी सरकार को स्वदेशी होने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें दो या तीन बार शादी नहीं करनी चाहिए। यह असमिया लोगों का रिवाज नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपको 11-12 साल की लड़कियों को शादी करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। आपको अपने बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहिए, न कि मदरसे में। स्वदेशी होने के लिए, किसी को यहां की संस्कृति को स्वीकार करना होगा।
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'मैं सभी का सम्मान करता हूं, बस कुछ चीजों पर दिक्कतें हैं'
सरमा ने कहा कि असमिया हिंदू, असमिया मुस्लिम- चाहे वे शंकरदेव का अनुसरण करें या नहीं, वे सभी का सम्मान करते हैं। जम्मू कश्मीर के बाद असम में मुसलमानों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। गौरतलब है कि असम कैबिनेट ने 1935 के 'असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम' को रद्द कर दिया था।
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गौरतलब है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि उनकी सरकार को किसी के खुद को स्वदेशी कहने से कोई समस्या नहीं है, जब तक वे बाल विवाह पर रोक लगाते हैं, बहुविवाह में शामिल नहीं होते और अपने बच्चो को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ये सभी पैरामीटर जो बड़े असमिया समाज का आंतरिक हिस्सा है।