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भगोड़े माल्या की संपत्ति बैंकों को सौंपने में आपत्ति नहीं: ईडी
Wed, 06 Feb 2019 05:19 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Wed, 06 Feb 2019 05:19 AM IST
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Vijay Mallya
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को मुंबई की विशेष अदालत को बताया कि उसे भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की संपत्तियों को बैंकों के समूह को सौंपने में कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि बैंकों को यह शपथपत्र देना होगा कि अगर अदालत भविष्य में इस राशि को जमा कराने को कहती है तो वे इसे कोर्ट को सौंप देंगे।
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एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह की ओर से दायर याचिका के जवाब में ईडी ने यह हलफनामा दिया है।
माल्या पर बैंकों का 9000 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाने का आरोप है। हालांकि बैंकों ने करीब 6,200 करोड़ रुपये का दावा किया है। विशेष पीएमएलए जज एमएस आजमी की अदालत में ईडी ने कहा कि उसने मामले को कोर्ट के फैसले पर छोड़ दिया है। हलफनामे में कहा गया है कि इस मामले में अदालत आवेदन को मंजूरी देने के बारे में निर्णय करने को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र है, लेकिन बैंकों के समूह से अंडरटेकिंग लेनी चाहिए।
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ईडी ने कहा कि एक को छोड़कर सभी आवेदनकर्ता सार्वजनिक बैंक हैं। लिहाजा जो संपत्ति मांगी गई है, वह सरकारी है और इसे बैंकों को सौंपना जनहित में है। लंदन की अदालत ने 10 दिसंबर 2018 को माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश दिया था। ब्रिटेन के गृहमंत्री ने सोमवार को माल्या को भारत वापस सौंपे जाने को मंजूरी दे दी है। हालांकि माल्या ने इस आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करने की बात कही है।
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माल्या की अपील पर सुनवाई में लगेंगे कई महीने
लंदन। उद्योगपति विजय माल्या ने ब्रिटिश सरकार के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई में कई महीनों का वक्त गुजर जाएगा। लंदन आधारित लॉ फर्म जायवाला एंड कंपनी के संस्थापक सरोश जायवाला ने बताया कि फैसले के खिलाफ अपील करने के बाद अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या इसे स्वीकार करने के लिए आधार है या नहीं। मामले की सुनवाई में महीनों लग सकते हैं क्योंकि अदालत की प्रक्रिया बेहद उलझी हुई है। पूरी प्रक्रिया में पांच से छह महीने का भी समय लग सकता है। हालांकि भारत सरकार त्वरित अपील प्रक्रिया के लिए आवेदन कर सकती है, लेकिन इसकी अनुमति मिलना सामान्य नहीं है। आपको तत्काल आवश्यकता दर्शानी होगी।