फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   No link with CJP, only helped secure venue for press meet: RJD MP Manoj Jha

मनोज झा बोले: कॉकरोच जनता पार्टी से कोई संबंध नहीं, सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए जगह दिलाने में मदद की

Thu, 04 Jun 2026 10:59 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 04 Jun 2026 10:59 PM IST
सार

राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए केवल कंस्टीट्यूशन क्लब में जगह दिलाने हेतु सिफारिश पत्र दिया था, लेकिन उनका इस संगठन या उसके अभियान से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि सांसद होने के नाते वह अक्सर सामाजिक संगठनों और पत्रकारों की इसी तरह मदद करते हैं। पढ़िए रिपोर्ट-
 

विज्ञापन
No link with CJP, only helped secure venue for press meet: RJD MP Manoj Jha
राजद सांसद मनोज झा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)

विस्तार

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया को एक सिफारिश पत्र दिया था। लेकिन उनका इस अभियान से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में वैचारिक स्पष्टता की कमी है।
विज्ञापन


मनोज झा ने बताया कि उन्होंने बुधवार को कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर पत्रकार सौरव दास के लिए जगह उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। सौरव दास कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता हैं और उन्होंने मदद के लिए उनसे संपर्क किया था। दास ने कहा कि कंस्टीट्यूशन क्लब में इस तरह की अनुमति के लिए किसी सांसद की सिफारिश जरूरी होती है, इसलिए उन्होंने मनोज झा से संपर्क किया था।
विज्ञापन


यह विवाद ऐसे समय सामने आया, जब इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि छह जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही सीजेपी को विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है या नहीं। हालांकि, सीजेपी ने ऐसे सभी दावों को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मनोज झा का सिफारिश पत्र सोशल मीडिया पर सामने आने और कुछ भाजपा नेताओं की ओर से साझा किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि सांसद होने के नाते वह अक्सर सामाजिक संगठनों और पत्रकारों को ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने में मदद करते हैं। 

दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे मनोज झा ने पत्रकारों से कहा, यह पत्र एक पत्रकार से जुड़ा था, जिससे मेरा संपर्क सोशल मीडिया के जरिये हुआ था। उन्होंने और दिल्ली विश्वविद्यालय के मेरे कुछ वरिष्ठ सहयोगियों ने मुझे प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में बताया था। इसके अलावा कुछ नहीं था। 

सिफारिशोंके लिए मिलते हैं अनुरोध: मनोज झा
सीजेपी ने बुधवार को कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। मनोज झा ने कहा कि कंस्टीट्यूशन क्लब के सदस्य के रूप में उनका रिकॉर्ड देखा जाए तो उन्होंने रिक्शा चालकों, ऑटो चालकों, घरेलू कामगारों और कई अन्य सामाजिक संगठनों को भी इसी तरह मदद उपलब्ध कराई है।

उन्होंने कहा, लोग मदद के लिए मेरे पास आते हैं और मैं उनकी सहायता करने की कोशिश करता हूं। इस मामले को भी उसी नजरिये से देखा जाना चाहिए। मैंने शरद यादव की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों के लिए भी सिफारिश पत्र दिए हैं। कई बार पत्रकार अपने परिवार में शादी होने पर आवास के लिए सिफारिश मांगते हैं। हमें रोजाना रेलवे आरक्षण और एम्स में इलाज से जुड़ी सिफारिशों के लिए भी अनुरोध मिलते हैं। 

ये भी पढ़ें: 'केवल ऐतिहासिक नहीं, भविष्य-केंद्रित हैं भारत-ब्रिटेन संबंध', कूपर के साथ बैठक में बोले जयशंकर


सौरव दास ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
सौरव दास ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि न तो मनोज झा और न ही किसी अन्य राजनेता का सीजेपी से कोई संबंध है।

उन्होंने एक्स पर लिखा, यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि राज्यसभा सांसद प्रोफेसर मनोज झा कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन कर रहे हैं। पूरी पारदर्शिता के लिए मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरी मांग पर उन्होंने सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए जगह उपलब्ध कराने हेतु सिफारिश पत्र दिया था, क्योंकि ऐसी सिफारिश केवल कोई सांसद ही कर सकता है। प्रोफेसर झा एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद हैं और वे मुझे तथा मेरे काम को अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए मैंने उनसे संपर्क किया। दोनों को जोड़कर देखना भ्रामक है और इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए। 

'आंदोलन में वैचारिक स्पष्टता की कमी'
सीजेपी पर अपनी राय पूछे जाने पर मनोज झा ने कहा कि वह ऐसे अभियानों या आंदोलनों पर टिप्पणी करना पसंद नहीं करते, जिनमें समानता, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर वैचारिक स्पष्टता न हो। उन्होंने कहा, मैंने 2012-13 में भी ऐसे ही एक आंदोलन के दौरान यही बात कही थी। जिन आंदोलनों की विचारधारा स्पष्ट नहीं होती, उन पर मैं टिप्पणी नहीं करता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed