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S Jaishankar: 'केवल ऐतिहासिक नहीं, भविष्य-केंद्रित हैं भारत-ब्रिटेन संबंध', कूपर के साथ बैठक में बोले जयशंकर
Thu, 04 Jun 2026 10:18 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 04 Jun 2026 10:18 PM IST
सार
S Jaishankar: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और ब्रिटेन हाल ही में हुए व्यापार समझौते और रक्षा सहयोग की योजना के आधार पर भविष्य-केंद्रित और मजबूत साझेदारी बनाने की स्थिति में हैं। उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए लाभकारी बताते हुए हाल के उच्चस्तरीय दौरों से संबंधों में आई मजबूती का जिक्र किया। पढ़िए रिपोर्ट-
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एस जयशंकर, विदेश मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि हाल ही में हुए व्यापक व्यापार समझौते और रक्षा उद्योग से जुड़ी भविष्य की कार्ययोजना के आधार पर भारत और ब्रिटेन नई, भविष्य-केंद्रित और दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी बनाने की मजबूत स्थिति में हैं। उन्होंने यह बात भारत दौरे पर आई ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर के साथ बैठक के दौरान कही।
जयशंकर ने हाल के महीनों में द्विपक्षीय संबंधों में हुए अहम घटनाक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा की और उसके बाद अक्तूबर में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की भारत यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी है।
'नई साझेदारी बनाने की बेहतर स्थिति'
उन्होंने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए), व्यापक रणनीतिक साझेदारी को अपनाने और रक्षा औद्योगिक रोडमैप को दोनों देशों की बड़ी उपलब्धियां बताया। जयशंकर ने कहा, आज हम भविष्य को ध्यान में रखकर और आपसी हितों पर आधारित नई साझेदारी बनाने की बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि सीईटीए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी कई चिंताओं को दूर करने में मदद करेगा।
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'भारत-ब्रिटेन संबंध ऐतिहासिक संबंधों तक सीमित नहीं'
जयशंकर ने कहा कि भारत और ब्रिटेन का संबंध अब केवल ऐतिहासिक या सांस्कृतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और उच्च तकनीक पर आधारित आगे बढ़ने वाली साझेदारी बन गया है।
ये भी पढ़ें: असम में कल कैबिनेट विस्तार: 12 विधायक लेंगे मंत्री पद की शपथ, तीन नए चेहरों को भी मिलेगी जगह
विदेश मंत्री ने भारत-ब्रिटेन दृष्टिकोण- 2035 का भी जिक्र किया, जिसमें विकास, प्रौद्योगिकी और नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा तथा शिक्षा जैसे पांच प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने ब्रिटेन के लिवरपूल विश्वविद्यालय के भारत में अपना परिसर खोलने के फैसले का भी स्वागत किया।
ब्रिटिश विदेश मंत्री ने क्या कहा?
वहीं, अपने संबोधन में यवेट कूपर ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत और ब्रिटेन की साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने सीईटीए को आर्थिक विकास का एक आधार बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण खनिज के क्षेत्र में सहयोग से भी दिखाई देती है।
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जयशंकर ने हाल के महीनों में द्विपक्षीय संबंधों में हुए अहम घटनाक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा की और उसके बाद अक्तूबर में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की भारत यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी है।
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'नई साझेदारी बनाने की बेहतर स्थिति'
उन्होंने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए), व्यापक रणनीतिक साझेदारी को अपनाने और रक्षा औद्योगिक रोडमैप को दोनों देशों की बड़ी उपलब्धियां बताया। जयशंकर ने कहा, आज हम भविष्य को ध्यान में रखकर और आपसी हितों पर आधारित नई साझेदारी बनाने की बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि सीईटीए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी कई चिंताओं को दूर करने में मदद करेगा।
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'भारत-ब्रिटेन संबंध ऐतिहासिक संबंधों तक सीमित नहीं'
जयशंकर ने कहा कि भारत और ब्रिटेन का संबंध अब केवल ऐतिहासिक या सांस्कृतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और उच्च तकनीक पर आधारित आगे बढ़ने वाली साझेदारी बन गया है।
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विदेश मंत्री ने भारत-ब्रिटेन दृष्टिकोण- 2035 का भी जिक्र किया, जिसमें विकास, प्रौद्योगिकी और नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा तथा शिक्षा जैसे पांच प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने ब्रिटेन के लिवरपूल विश्वविद्यालय के भारत में अपना परिसर खोलने के फैसले का भी स्वागत किया।
ब्रिटिश विदेश मंत्री ने क्या कहा?
वहीं, अपने संबोधन में यवेट कूपर ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत और ब्रिटेन की साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने सीईटीए को आर्थिक विकास का एक आधार बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण खनिज के क्षेत्र में सहयोग से भी दिखाई देती है।