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यूपी में बाकी सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के लिए नहीं होगी चुनाव समिति की बैठक
हिमांशु मिश्र/ नई दिल्ली
Updated Tue, 24 Jan 2017 05:07 AM IST
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अमित शाह (फाइल फोटो)
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विधानसभा चुनाव में टिकट बांटने के मामले में यूपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी बादशाहत साबित कर दी। केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी करने में भले ही तीन दिन लग गए। मगर अपवादस्वरूप दो-तीन सीटों को छोड़ कर आखिरकार शाह की चली। यही नहीं, सहयोगियों को दी जाने वाली डेढ़ दर्जन सीटों को छोड़ कर बाकी बची 81 सीटों के लिए अब चुनाव समिति की बैठक में उम्मीदवार तय करने के बदले इसका अधिकार भी शाह को दे दिया गया है।
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इन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम पर माथापच्ची का काम करीब करीब पूरा हो गया है। पूर्व की दो सूचियों की एक-एक सीट की तरह ही बाकी बची सीटों के लिए भी पूर्व में कराए गए सर्वे के आधार पर जातिगत समीकरण का खास ख्याल रखा जा रहा है। यहां तक की सहयोगी अपना दल और सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी के हिस्से की सीटों के लिए भी पार्टी ने जातिगत समीकरण का पूरा ध्यान रखने की सलाह दी है।
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पहली सूची जारी होने के बाद जरूर सूबे के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी थी
उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया में शामिल एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पहली सूची जारी होने के बाद जरूर सूबे के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी थी। कुछ नेताओं ने दलबदलुओं को टिकट देने पर आपत्ति जताई थी। दूसरी सूची के लिए हुई चुनाव समिति की बैठक के बाद कई सीटों पर फच्चर फंसने सूची जारी करने में तीन दिन लग गए। मगर दो तीन सीटों को छोड़ दें तो आखिरकार शाह की ओर से कई स्तरों पर कराए गए सर्वे और इसमें जातिगत खांचे में फिट बैठने वाले नेताओं को ही टिकट मिला। यहां तक कि जिन नेताओं के रिश्तेदारों को उपकृत करने के मामले में भी जातिगत खांचे में फिट बैठने की शर्त पूरी की गई है। दलबदलओं को टिकट देने पर विवाद के बावजूद दूसरी सूची में 51 ऐसे नेताओं को जगह दिया जाना बताता है कि शाह ने इस मामले में किसी की नहीं सुनी।
क्या है सर्वे
शाह ने उत्तर प्रदेश के चुनाव की तैयारी करीब दो वर्ष पूर्व ही शुरू कर दी थी। इस क्रम में उन्होंने अपने सबसे भरासेमंद नेता के जरिए जातिगत स्तर पर एक एक सीट की पड़ताल के लिए छह बार सर्वे कराए। अंतिम सर्वे में कार्यकर्ताओं की राय ले कर एक एक सीट पर उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया गया। शाह समर्थकों का दावा है कि चुनाव पूर्व आया राम और गया राम के खेल के दौरान भी उन्हीं नेताओं को प्रवेश मिला जो संबंधित सीट पर जातिगत खांचे पर फिट बैठ रहे थे। इस मामले में करीब डेढ़ दर्जन शहरी सीटों पर ही थोड़ी नरमी बरतने के साथ कहीं कहीं दूसरी वरीयता वाले नेताओं को टिकट दिया गया।
क्या है सर्वे
शाह ने उत्तर प्रदेश के चुनाव की तैयारी करीब दो वर्ष पूर्व ही शुरू कर दी थी। इस क्रम में उन्होंने अपने सबसे भरासेमंद नेता के जरिए जातिगत स्तर पर एक एक सीट की पड़ताल के लिए छह बार सर्वे कराए। अंतिम सर्वे में कार्यकर्ताओं की राय ले कर एक एक सीट पर उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया गया। शाह समर्थकों का दावा है कि चुनाव पूर्व आया राम और गया राम के खेल के दौरान भी उन्हीं नेताओं को प्रवेश मिला जो संबंधित सीट पर जातिगत खांचे पर फिट बैठ रहे थे। इस मामले में करीब डेढ़ दर्जन शहरी सीटों पर ही थोड़ी नरमी बरतने के साथ कहीं कहीं दूसरी वरीयता वाले नेताओं को टिकट दिया गया।