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Hindi News ›   India News ›   No coercive action against Newsclick founder Prabir Purkayastha subject to his joining investigation Delhi High Court tells ED

दिल्ली उच्च न्यायालय: न्यूजक्लिक के संस्थापक यदि जांच में शामिल तो उन पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं, कोर्ट का ईडी को निर्देश

Thu, 29 Jul 2021 07:49 PM IST
प्रतिभा ज्योति पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Thu, 29 Jul 2021 07:49 PM IST
सार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को यह निर्देश दिया है कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यूजक्लिक के संस्थापक और प्रधान संपादक  प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए, बशर्ते कि वह जांच में शामिल हों।

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No coercive action against Newsclick founder Prabir Purkayastha subject to his joining investigation Delhi High Court tells ED
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका - फोटो : ANI

विस्तार

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने कहा कि न्यूजक्लिक के संस्थापक और प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को दी गई अंतरिम सुरक्षा सुनवाई की अगली तारीख 2 सितंबर तक लागू रहेगी।

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ईडी के वकील के अनुरोध पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट  (पीएमएलए) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत के लिए पुरकायस्थ की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी गई है। अदालत ने नोट किया कि ईडी ने अभी तक संबंधित पक्षों को प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) की प्रति नहीं दी है। इस मामले में दर्ज ईसीआईआर की एक प्रति मांगने वाली न्यूज पोर्टल की याचिका पर ईडी को नोटिस भी जारी किया था। उच्च न्यायालय ने 21 जून को ईडी को मामले के संबंध में समाचार पोर्टल और उसके प्रधान संपादक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था।
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समाचार पोर्टल के खिलाफ एफडीआई हासिल करने का आरोप
समाचर पोर्टल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर सामने आया है। प्राथमिकी में यह आरोप लगाया गया है कि पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी यूएसए से 9.59 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हासिल किया है। 
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दिल्ली पुलिस का आरोप सरकारी खजाने को पहुंचाया नुकसान
दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी में यह कहा गया है कि इस निवेश का 45 प्रतिशत से अधिक वेतन/परामर्श, किराए और अन्य खर्चों के भुगतान के लिए रखा गया, जिसका भुगतान कथित तौर पर गलत उद्देश्यों के लिए किया गया था। आरोप है कि कंपनी ने देश के एफडीआई और अन्य कानूनों का उल्लंघन किया है और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है। ईडी ने दिल्ली पुलिस की इसी प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए मनी लॉड्रिंग मामले की जांच शुरू की है। इस दौरान उसने विदेश से प्राप्त धन के संबंध में कई स्थानों पर तलाशी ली थी।

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