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Nitish Rane: 'जो पेड़ काटने के खिलाफ बोल रहे हैं, उन्हें बकरीद पर भी...', तपोवन कटाई विवाद पर बोले नितेश राणे

Thu, 04 Dec 2025 06:57 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 04 Dec 2025 06:57 PM IST
सार

Tree Cutting Controversy: तपोवन में पेड़ काटने वाले बयान पर महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने कहा कि मेरा बस इतना कहना था कि जो नियम एक धर्म पर लागू होता है, उसे दूसरे धर्मों पर भी लागू किया जाना चाहिए। जो लोग इसके खिलाफ बोल रहे हैं, उन्हें बकरीद के दौरान भी अपनी आवाज उठानी चाहिए। 
 

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Nitish Rane says Those who are speaking out against tree cutting should be allowed to do so even on Bakrid
नितेश राणे, भाजपा नेता - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र के तपोवन में पेड़ों की कटाई को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य के मंत्री नितेश राणे ने अपने बयान से राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। राणे ने कहा कि अगर एक नियम किसी एक धर्म पर लागू होता है, तो वही नियम दूसरे धर्मों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बकरीद पर भारी संख्या में बकरों की कुर्बानी दी जाती है, तब आवाज क्यों नहीं उठती और सिर्फ हिंदू त्योहारों को ही निशाना क्यों बनाया जाता है। 
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राणे ने अपने बयान में कहा कि तपोवन में पेड़ कटाई के मुद्दे पर जो लोग विरोध कर रहे हैं, वही लोग बकरीद के दौरान भी आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य केवल यह बताना था कि किसी भी धर्म के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए। उनका कहना है कि अगर पर्यावरण या संवेदनशीलता की बात होती है, तो फिर यह बात हर स्थिति पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।
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कटाई पर राजनीतिक घमासान
तपोवन क्षेत्र में पेड़ कटाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता भी सोशल मीडिया पर इस फैसले के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इसी विवाद के बीच राणे का बयान सामने आया, जिसने बहस की दिशा बदल दी। राणे के वक्तव्य ने विपक्ष को एक और मुद्दा दे दिया है, जिस पर वे सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने के आरोप लगा रहे हैं।
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धार्मिक तुलना पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने राणे की टिप्पणी की आलोचना की है। उनका कहना है कि धार्मिक परंपराओं की तुलना करके विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाया जा रहा है। हालांकि राणे का तर्क है कि उन्होंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि समानता के सिद्धांत पर टिप्पणी की है। राणे का कहना है कि अगर पर्यावरण की रक्षा का सवाल है, तो यह सिद्धांत सभी त्योहारों और समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

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