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नीति आयोग की दो टूक, निजी क्षेत्र में नहीं होना चाहिए आरक्षण

Tue, 17 Oct 2017 07:44 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 17 Oct 2017 07:44 PM IST
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Niti Aayog vc rajiv kumar says Against job reservation in private sector
राजीव कुमार, उपाध्यक्ष, नीति आयोग

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने मंगलवार को दो-टूक लहजे में कहा कि वह प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण दिए जाने के खिलाफ हैं। कई राजनेता की ओर से निजी क्षेत्र में एससी-एसटी को आरक्षण देने की मांग करने के सवाल पर उन्होंने यह बयान दिया।

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राजीव कुमार ने यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की नौकरियों में कोई आरक्षण नहीं होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह माना कि रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। सरकार हर साल 10-12 लाख लोगों को ही रोजगार दे पा रही है जबकि प्रत्येक वर्ष रोजगार चाहने वालों की संख्या करीब 60 लाख है।
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कुमार ने स्वीकार किया कि रोजगार के मोर्चे पर बहुत अच्छी स्थिति नहीं है। हर साल 10-12 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है जबकि रोजगार चाहने वालों की संख्या 60 लाख है। पहले श्रमिकों को असंगठित क्षेत्र में आसानी से रोजगार मिल जाता था लेकिन उस क्षेत्र में अब कोई गुंजाइश नहीं बची है। इसके मद्देनजर रोजगार को लेकर लोगों की शिकायतें बढ़ गई हैं।


मालूम हो कि कई पार्टियों के नेता अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग करते रहे हैं। इनमें लोक जन शक्ति पार्टी के राम विलास पासवान और बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार प्रमुख हैं। इनके अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया भी इसकी मांग कर चुके हैं।
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नीतीश कुमार ने कुछ दिनों पहले कहा था कि, ‘आर्थिक उदारीकरण के इस दौर में अगर निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई तो यह सामाजिक न्याय के साथ मजाक होगा।’ हालांकि उद्योग जगत इन राजनेताओं से सहमत नहीं है और आरक्षण का विरोध करता है। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ हुनरमंद श्रमिकों की कमी होगी बल्कि निवेश भी प्रभावित होगा।

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