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देश में ‘हाइपरलूप’ यात्रा के लिए होगा अध्ययन, नीति आयोग ने गठित की समिति
Wed, 25 Nov 2020 03:43 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 25 Nov 2020 03:43 AM IST
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Hyperloop train (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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हो सकता है आप जल्द ही घंटों के सफर को मिनटों में बदलने वाले हाइपरलूप पॉड में अपने ही देश में सफर कर पाएं। दो सप्ताह पहले अमेरिका में पहली बार इंसानों के साथ प्रायोगिक परीक्षण में सफल रही इस तकनीक की भारत के लिहाज से उपयोगिता परखी जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार के नीति आयोग ने एक समिति का गठन किया है। यह उच्चस्तरीय समिति हाइपरलूप यात्रा की तकनीकी और व्यवसायिक व्यवहारिकता का अध्ययन करने के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी।
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दो सप्ताह पहले वर्जिन हाइपरलूप कंपनी ने दो इंसानों के साथ अपना पहला टेस्ट रन अमेरिका के लास वेगास में किया था। करीब 500 मीटर के इस टेस्ट ट्रैक को हाइपलूप पॉड ने यात्रियों को साथ लेकर 161 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से 15 सेकंड में पूरा कर लिया था। इसके बाद पूरी दुनिया में इस तकनीक को लेकर उत्सुकता पैदा हो गई है। नीति आयोग की तरफ से कहा गया है कि इस उभरती हुई यात्रा तकनीक के तकनीकी और व्यवसायिक पहलू को देखा जाना आवश्यक है।
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इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया गया है। इस समिति का चेयरमैन नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत को बनाया गया है। वीके सारस्वत के अलावा समिति में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन व सीईओ वीके यादव, आवासीय व शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सचिव और महाराष्ट्र सरकार के यातायात सचिव को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है।
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डीआरडीओ चेयरमैन, दिल्ली मेट्रो ट्रेन के प्रबंध निदेशक, आईआईटी दिल्ली के निदेशक और पूर्वानुमान व आकलन परिषद के चेयरमैन (तकनीकी जानकारी) भी समिति के सदस्य बनाए गए हैं। नीति आयोग के सलाहकार (संपर्क ढांचा) सुधेंदु ज्योति को समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है। यह समिति हाइपरलूप यात्रा के तकनीकी और व्यवसायिक पहलू के अलावा वित्तीय व्यवहारिकता, सुरक्षा मानक और खरीद नियमन का अध्ययन करने के बाद छह महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
क्या है हाइपरलूप तकनीक
हाइपरलूप तकनीक यात्रा का ऐसा तरीका है, जो 1000 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे भी ज्यादा गति से लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकता है। यह एक कैप्सूल जैसी चुंबकीय ट्रेन होती है, जो खंभों पर बने खास वैक्यूम पाइप के अंदर इलेक्ट्रिक चुंबक की मदद से हवा में तैरते हुए चलती है। इसमें पहिये नहीं होते हैं। इसके लिए न तो किसी प्रकार के ईंधन वाले इंजन की आवश्यकता होती है और न ही बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। इस कारण यह सफर का पर्यावरण मित्र तरीका कहा हा सकता है। इस तकनीक का विचार 2013 में इलेक्ट्रिक कार कपंनी टेस्ला और पहली निजी व्यवसायिक अंतरिक्ष यात्रा कंपनी स्पेसएक्स के मालिक एलेन मस्क को आया था। इसके बाद 2014 में वर्जिन हाइपरलूप कंपनी की स्थापना की गई थी।
महाराष्ट्र में भाजपा सरकार ने दी थी हाइपरलूप की इजाजत
पिछले साल अगस्त में महाराष्ट्र की तत्कालीन भाजपा सरकार ने मुंबई से पुणे के बीच हाइपरलूप प्रोजेक्ट तैयार करने की इजाजत वर्जिन हाइपरलूप को दी थी। ढाई साल में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट के 11.8 किलोमीटर लंबे पहले चरण पर करीब 10 अरब डॉलर की लागत आनी थी। चुनाव में भाजपा की सरकार हटकर शिवसेना के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार आ जाने के बाद इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया था। हालांकि वर्जिन हाइपरलूप ने पिछले महीने बंगलूरू इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। यह साझेदारी एयरपोर्ट से एक हाइपरलूप कॉरिडोर के निर्माण की व्यवहारिकता का अध्ययन करने के लिए की गई है।