राहुल गांधी का कर्जा माफ किसान का दर्द कम करने की दवा भर है, उपचार नहीं : नीति आयोग
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के किसानों के कर्ज माफी पर अड़ जाने की घोषणा ने नई बहस छेड़ दी है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और म.प्र. में किसानों का कर्जा माफ कर देने की पहल ने केन्द्र सरकार और भाजपा के भी कान खड़े कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला नीति आयोग भी इससे अछूता नहीं है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने इसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष को भी नसीहत दी है। राजीव कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कर्जमाफी के सवाल पर कहा है कि कर्जमाफी किसानों की समस्या का स्थायी उपचार नहीं है, बल्कि यह उनका दर्द करने की दवा भर है।
मोदी सरकार ने किया काम
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि किसानों के लिए जितना काम मोदी सरकार ने किया है, उतना शायद ही किसी सरकार ने किया हो। उन्होंने कहा कि जहां तक मैं समझता हूं, शायद ही किसानों के लिए किसी भी सरकार ने कभी भी उतना काम किया हो, जितना मौजूदा सरकार कर रही है।
उन्होंने किसानों के कर्जा माफ करने पर कहा कि सरकार सबकुछ देखने के बाद कदम उठाती है। राजीव कुमार जब किसानों की कर्जमाफी पर अपना पक्ष रख रहे थे तो किसानों की कर्जमाफी को लेकर सरकार की चिंता साफ दिखाई दे रही थी। राजीव कुमार ने कहा कि अभी तक किसी भी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू नहीं किया। लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे लागू करने की शुरुआत की।
मैं ही चैंपियन
राजीव कुमार से जब राहुल गांधी के किसानों की कर्जमाफी से जुड़े ट्वीट के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं इस पर क्या कह सकता हूं? यह तो कुछ वैसा ही है जैसे मानो या न मानो मैं ही चैंपियन। अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा है कि उन्होंने असम और गुजरात की सरकार को किसानों की कर्जमाफी पर जगा दिया है, लेकिन अभी प्रधानमंत्री सोए हुए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने इसमें आगे लिखा कि वह प्रधानमंत्री को भी जगाएंगे।
तो क्या प्रधानमंत्री किसानों का दर्द बढ़ा रहे हैं?
राजीव कुमार का एक जवाब चौंकाने वाला है। उन्होंने किसानों के प्रति मोदी सरकार के कामकाज की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने सबसे अधिक काम किया। इसी के साथ किसानों की कर्जमाफी को किसानों की समस्या का स्थायी समाधान बताने की बजाय इसे उनका दर्द कम करने की दवाई भर बताया।
लेकिन इसी के साथ कहा कि मोदी सरकार ने किसानों का कर्ज बढ़ाया है। मोदी सरकार ने किसानों को खेती-खलिहानी के लिए दिए जाने वाले कर्ज की तादाद बढ़ाई है। इसे 10.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया है।