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Niti Aayog: नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा, दूध के विभिन्न उत्पादों को दूसरे देशों में भेजें

Mon, 17 Apr 2023 07:19 AM IST
वीरेंद्र शर्मा अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Mon, 17 Apr 2023 07:19 AM IST
सार

चंद के अनुसार, एक देश यदि  आयात के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ है तो वह निर्यात प्रतिस्पर्धी नहीं हो सकता है। निर्यात प्रतिस्पर्धी होने के लिए आयात की तुलना में अधिक ऊंची प्रतिस्पर्धा की जरूरत होती है।

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NITI Aayog member Ramesh Chand said milk to become export competitive to get a share in the global market
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन चुका है। अगर उसे अपने सरप्लस (ज्यादा) दूध के लिए वैश्विक बाजार में हिस्सा हासिल करना है, तो निर्यात प्रतिस्पर्धी बनना होगा। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने वर्किंग पेपर में कहा कि भारत का डेयरी उद्योग किसी भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का विरोध करता रहा है, जिसमें डेयरी उत्पादों में कारोबार का आयात शामिल हो।
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चंद के अनुसार, एक देश यदि  आयात के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ है तो वह निर्यात प्रतिस्पर्धी नहीं हो सकता है। निर्यात प्रतिस्पर्धी होने के लिए आयात की तुलना में अधिक ऊंची प्रतिस्पर्धा की जरूरत होती है। यह मुद्दा भारत में डेयरी उद्योग के भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। डेयरी उद्योग को अपने कुछ घरेलू उत्पादन को विदेशी बाजारों में भेजने का रास्ता निकालना होगा। साथ ही रविवार को उन्होंने सुझाव दिया कि सिर्फ लिक्विड दूध को भेजने के बजाय हमें अलग-अलग उत्पादों का प्रोसेसिंग कर निर्यात करना चाहिए। रमेश चंद ने कहा, डेयरी उद्योग के निवेश में कुछ बदलाव की जरूरत होगी। अगर भारत दूध की गुणवत्ता और पशुधन स्वास्थ्य के मुद्दे को हल कर पाता है, तो वह कुछ बड़े बाजारों में अपनी पैठ बना सकता है। अगले 25 साल के लिए डेयरी उद्योग का लक्ष्य और दृष्टिकोण भारत को डेयरी उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक बनाने का होना चाहिए। 
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5.3% की दर से बढ़ रहा है उत्पादन
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में विश्व का डेयरी निर्यात 63 अरब डॉलर था। वहीं भारत का निर्यात सिर्फ 39.2 करोड़ डॉलर था। आंकड़ों से पता चलता है कि सालाना आधार पर दूध उत्पादन 5.3 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। 2005 के बाद से दूध उत्पादन की वृद्धि दर इसलिए ऊंची रही है, क्योंकि विदेशी नस्लों के बजाय स्वदेशी नस्लों पर जोर दिया जाने लगा। 
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3 चुनौतियों से प्रभावित होगा डेयरी उद्योग
चंद के अनुसार, डेयरी क्षेत्र को तीन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसमें लगातार दुधारू पशुओं की कम हो रही उत्पादकता, ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन और दुनियाभर में लगातार जलवायु परिवर्तन पर हानिकारक प्रभाव और निर्यात का बहुत कम हिस्सा शामिल हैं।
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