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पनामा पेपर्स लीक केस: टाटा की करीबी नीरा राडिया का नाम भी शामिल

Wed, 06 Apr 2016 08:26 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 06 Apr 2016 08:26 PM IST
सार

  • टाटा की करीबी मानी जाने वाली हैं सोशलाइट नीरा राडिया
  • राडिया का नाम इससे पहले यूपीए के दौरान हुए करोंड़ो के 2जी घोटाले में आ चुका है

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Niira Radia in Panama leak case claims paper
नीरा रा‌डिया

विस्तार

पनामा पेपर्स लीक मामले में बॉलीवुड अदाकार अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या राय के बाद रतन टाटा की करीबी मानी जाने वाली सोशलाइट नीरा राडिया का भी नाम सामने आ रहा है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक लीक हुए दस्तावेजों से इस बात का खुलासा हुआ है कि राडिया ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताकर एक कंपनी बनाई।

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इन पेपर्स की जांच में पता चला है कि विदेश में राडिया की एक कंपनी को 1994 में मोसेक फोंसेका द्वारा ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) में रजिस्टर कराया गया, जिसका नाम क्राउनमार्ट इंटरनेशनल ग्रुप लिमिटेड है।
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रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2004 तक इससे जुड़े दस्तावेजों पर राडिया ने ही हस्ताक्षर किए थे। खबर के अनुसार दस्तावेजों में राडिया के दिल्ली स्थित घर का पता भी लिखा है जबकि उनके पिता की दो संपत्तियों का जिक्र है। उल्‍लेखनीय है कि राडिया का नाम इससे पहले यूपीए के दौरान हुए करोंड़ो के 2जी घोटाले में आ चुका है।

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किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी

Niira Radia in Panama leak case claims paper
अारबीअाई

वहीं इस मामले पर भारतीय रिजर्व बैंक ने जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के खिलाफ सतर्क किया। साथ ही कहा कि वह इस मामले में सबूतों की जांच कर यह पता करेगा कि क्या अवैध है और क्या वैध।

पनामा दस्तावेज ने लगभग 500 भारतीयों की सूची का खुलासा किया है जिन्होंने कथित तौर पर अपने पैसे पनामा में विदेशी इकाइयों में लगाए हुए हैं। इनमें कई सेलेब्रिटी और उद्योगपतियों के नाम भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि पनामा को टैक्स हैवन माना जाता है।

आरबीआई इसकी जांच के लिए सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स का हिस्सा है। एसोचैम के एक सम्मेलन में आए आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एसएस मुंद्रा ने कहा, ‘इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि सब कुछ वैध है या अवैध, जल्दबाजी होगी।’

पनामा दस्तावेज लीक होने के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने इसकी जांच के लिए एक टीम गठित की जिसमें सीबीडीटी, आरबीआई और एफआईयू के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम इस बात की पड़ताल करेगी कि टैक्स हैवन में जमा किया गया धन वैध है या अवैध। 

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