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एल्गर परिषद-माओवादी लिंक केस: एनआईए ने अमेरिकी कंपनी की रिपोर्ट पर उठाए सवाल

Sun, 02 May 2021 03:46 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 02 May 2021 03:46 AM IST
सार

  • अमेरिकी कंपनी ने फोरेंसिक रिपोर्ट में रौना विल्सन के कंप्यूटर में सबूत प्लांट करने का जताया था संदेह

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NIA rejected forensic report from a US firm in Elgar Council Maoist links case
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक अमेरिकी कंपनी की उस फोरेंसिक रिपोर्ट पर सवाल उठाया है, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता रौना विल्सन के कंप्यूटर में इलेक्ट्रॉनिक सबूत प्लांट किए जाने का संदेह जताया गया है। विल्सन पुणे के भीमा-कोरेगांव इलाके में जातीय हिंसा के लिए जिम्मेदार एल्गर परिषद के आयोजन के पीछे माओवादियों का हाथ होने से जुड़े मामले में आरोपी हैं।

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एनआईए ने बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार को अपने अधिकारी विक्रम झाकाते के जरिये एक हलफनामा दाखिल किया। एनआईए ने हलफनामे में कहा कि वह अमेरिकी कंपनी की रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों को मजबूती के साथ खारिज करती है।
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एनआईए ने कहा कि सबूत गढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक सबूत प्लांट करने के विल्सन के आरोप स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं। केंद्रीय एजेंसी ने कहा, अमेरिकी कंपनी की रिपोर्ट पर आधारित विल्सन की याचिका पोषणीय नहीं है। साथ ही एजेंसी ने हाईकोर्ट से याचिका को खारिज करने और विल्सन पर इसे दाखिल करने के लिए जुर्माना लगाने की भी गुहार लगाई। 
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एजेंसी ने कहा कि कंपनी की रिपोर्ट और एक पत्रिका की न्यूज स्टोरी चार्जशीट का हिस्सा नहीं थी और विल्सन अपने आरोप खत्म कराने के लिए उसका सहारा नहीं ले सकते।

एनआईए ने कहा कि अमेरिकी कंपनी की रिपोर्ट में खुद कहा गया है कि ये सबूत कथित तौर पर कंप्यूटर में प्लांट करने वाले व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल है। विल्सन को मुकदमे की कार्यवाही के दौरान सबूतों को गढ़े जाने के आरोप को साबित करना होगा।


साथ ही कंपनी को बिना अदालत की इजाजत के ऐसी राय देने का कोई अधिकार नहीं था, जबकि मुकदमे की कार्यवाही लंबित है और मुद्दा न्यायालय के विचाराधीन है। एनआईए ने कहा कि विल्सन की याचिका का एकमात्र मकसद मुकदमे की कार्यवाही में देरी करना है।

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