फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   NIA court may pronounce verdict on Maharashtra Malegaon bomb blast case on July 31

मालेगांव बम धमाका: 17 साल बाद फैसले की घड़ी, कल NIA कोर्ट सुना सकती है फैसला; साध्वी प्रज्ञा समेत सात आरोपी

Wed, 30 Jul 2025 01:34 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 30 Jul 2025 01:34 PM IST
सार

महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम धमाके के मामले में करीब 17 साल बाद फैसला सामने आने की संभावना तेज हो गई है।  इस मामले में पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सात आरोपियों पर आतंकवाद और साजिश के गंभीर आरोप हैं। एनआईए ने आरोपियों को सजा देने की मांग की है। ऐसे में सबकी निगाहें गुरुवार को एनआईए कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

विज्ञापन
NIA court may pronounce verdict on Maharashtra Malegaon bomb blast case on July 31
मालेगांव बम विस्फोट मामला - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 हुए बम धमाके के मामले में करीब 17 साल के बाद अब फैसला सामने आने की उम्मीद तेज हो गई है। संभावना इस बात की तेज है कि मामले में गुरुवार 31 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय जाृंच एजेंसी (एनआईए) कोर्ट फैसला सुना सकती है। यह मामला मुंबई से लगभग 200 किमी दूर स्थित मालेगांव में हुआ था, जो एक संवेदनशील और मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

विज्ञापन

बता दें कि मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र की आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) ने की थी। इसके बाद 2011 में केस राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया। 2018 से कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ और 19 अप्रैल 2025 को बहस पूरी हुई। ऐसे में अब फैसला कल यानी 31 जुलाई 2025 को आने की संभावना है। 

विज्ञापन


कौन-कौन हैं आरोपी? 
मामले में पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी पर आतंकवाद और आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप लगे हैं। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मुकदमा चला है, जिनमें हत्या, साजिश, सांप्रदायिकता फैलाना, और आतंक फैलाने जैसे आरोप शामिल हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले की जांच की और कोर्ट से आरोपियों को उनके अपराध के अनुसार सजा देने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- SC: 'आरोपियों की पेशी के लिए क्रिकेट स्टेडियम की जरूरत होगी', बालाजी केस में स्टालिन सरकार को 'सुप्रीम' फटकार

क्या है एनआईए का पक्ष, समझिए
अब बात अगर मामले में एनआईए के पक्ष की करें तो धमाका रमजान के महीने में और नवरात्रि से ठीक पहले हुआ, जिससे यह साबित होता है कि हमले का मकसद मुस्लिम समुदाय के बीच डर पैदा करना, सांप्रदायिक तनाव फैलाना और राज्य की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना था। एनआई का कहना है कि उनके पास पक्के और विश्वसनीय सबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि सभी आरोपी साजिश का हिस्सा थे और धमाके को अंजाम देने में उनकी सीधी भूमिका थी। हालांकि जांच में 323 गवाहों के बयान दर्ज हुए, जिनमें से 37 गवाह मुकर गए।


ये भी पढ़ें:- Malegaon Blast: 'सांप्रदायिक दरार डालने के लिए किया गया था मालेगांव ब्लास्ट', अपनी आखिरी दलील में NIA का बयान

अब समझिए क्या है आरोपियों की दलील
अब बात इस मामले में आरपियों के पक्ष की करें तो प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया है और उनके खिलाफ सबूत गढ़े गए हैं। वहीं पुरोहित ने कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और जांच में कई खामियां रही हैं। इसके साथ ही बाकी आरोपियों ने भी यही कहा कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है और केस में कई विरोधाभासी बातें हैं।

पीड़ित पक्षों ने क्या कहा?
वहीं मामले में पीड़ितों की ओर से कोर्ट में कहा गया कि सभी आरोपियों की दलीलें आपस में मेल नहीं खातीं, कोई कहता है धमाका हुआ ही नहीं, तो कोई इसका दोष स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (एसआईएमआई) पर डालता है। इन विरोधाभासों से यह साफ होता है कि प्रॉसिक्यूशन का केस मजबूत है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed