गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल: कई राज्यों में संदिग्धों के ठिकानों पर एनआईए की छापेमारी, आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए
Ghazwa-e-Hind Terror Module Case: एनआईए ने पाकिस्तान समर्थित गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल मामले में रविवार को कई राज्यों में छापेमारी की। एजेंसी ने दावा किया कि उसने इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।
विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पाकिस्तान समर्थित गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल मामले में रविवार को कई राज्यों में छापेमारी की। एजेंसी ने दावा किया कि उसने इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। छापेमारी में उन संदिग्धों के पाकिस्तानी आकाओं के साथ संबंधों का भी पता चला है, जिनके परिसरों की तलाशी ली गई। एनआईए ने कहा कि ये संदिग्ध अपने संचालकों के संपर्क में थे और भारत विरोधी विचार का प्रचार करने में शामिल थे।
एजेंसी ने कहा कि उसने आज मध्य प्रदेश के देवास, गुजरात के गिर सोमनाथ, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और केरल के कोझिकोड जिले में संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की। एनआईए ने कहा, कार्रवाई के दौरान उसने मोबाइल फोन और सिम कार्ड के अलावा कई दस्तावेज भी जब्त किए, जो RC-32/2022/NIA-DLI मामले से जुड़े हैं। इस मामले को आमतौर पर गजवा-ए-हिंद, पटना (बिहार) के रूप में जाना जाता है।
एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला पिछले साल 14 जुलाई को बिहार के फुलवारीशरीफ पुलिस ने शुरू में दर्ज किया था, जब मरघूब अहमद दानिश उर्फ ताहिर की गिरफ्तारी हुई थी। वह जैन नाम के एक पाकिस्तान व्यक्ति द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप एडमिनिस्ट्रेटर था। अधिकारी ने कहा कि आरोपी ताहिर ने भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और यमन सहित अन्य देशों के कई लोगों को समूह में जोड़ा था। वह टेलीग्रामी और बीआईपी जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर भी सक्रिय था।
एनआईए के प्रवक्ता ने कहा, पाकिस्तानी आकाओं के द्वारा भारत में गजवा-ए-हिंद के नाम पर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के मकसद से व्हाट्सएप ग्रुप को संचालित किया जा रहा था। अधिकारी ने कहा कि एनआईए की जांच से पता चला है कि ताहिर पूरे भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्लीपर सेल बनाने के गोपनीय उद्देश्य से ग्रुप के सदस्यों को प्रेरित करने की कोशिश कर रहा था। उसने 'बीडी गजवा-ए-हिंदबीडी' के नाम से एक और व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया था, जिसमें उसने बांग्लादेशी नागरिकों को जोड़ा था।
एनआईए पिछले साल 22 जुलाई से मामले की जांच कर रही है जब उसने राज्य पुलिस से जांच अपने हाथ में ली थी। आतंकवाद रोधी एजेंसी ने मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ छह जनवरी को भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोपपत्र दायर किया था।