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UAPA: एनएचआरसी प्रमुख ने यूएपीए को लेकर दिया बड़ा बयान, सशस्त्र बलों की भी सराहना की

Wed, 23 Nov 2022 11:02 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 23 Nov 2022 11:02 PM IST
सार

एनएचआरसी प्रमुख न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि प्राचीन भारतीय मूल्य लोगों को प्रकृति में सभी तत्वों की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। ये पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं। नैतिकता से रहित प्रौद्योगिकी पर्यावरण और पृथ्वी पर जीवन के लिए विनाशकारी होगी।

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NHRC chief says Special laws like UAPA were enacted to protect human rights not take them away
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्रा - फोटो : PTI

विस्तार

एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने बुधवार को  यूएपीए को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम जैसे कुछ विशेष कानून मानवाधिकारों को छीनने के लिए नहीं बनाए गए हैं। बल्कि ये मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हैं। उन्होंने सीआईएसएफ और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एनएचआरसी की 27वीं वार्षिक वाद-विवाद प्रतियोगिता में ये बयान दिया। 

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एनएचआरसी ने इस बाबत एक बयान भी जारी किया। एनएचआरसी प्रमुख न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने इस कार्यक्रम में कहा कि एक विरोधी से निपटने में आनुपातिक बल का उपयोग करने की अवधारणा "मानव धर्म" के भारतीय विचार में अंतर्निहित है। मानव अधिकारों का प्रचार और संरक्षण भारतीय संस्कृति, दर्शन और अभ्यास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी उत्पत्ति प्राचीन भारतीय शास्त्रों में 'ऋग्वेद' के ठीक बाद से हुई है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि रामायण काल में भी यह विचार सामने आया। जब भगवान राम ने लक्ष्मण को युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर विनाश के हथियार के बजाय आनुपातिक बल का उपयोग करने की सलाह दी थी। ऐसा ही महाभारत काल में भी सिद्धांतों के आधार पर युद्ध लड़े जाते थे।  
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अपने संबोधन में एनएचआरसी प्रमुख न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि प्राचीन भारतीय मूल्य लोगों को प्रकृति में सभी तत्वों की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। ये पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं। नैतिकता से रहित प्रौद्योगिकी पर्यावरण और पृथ्वी पर जीवन के लिए विनाशकारी होगी। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता की रक्षा करने और नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की भी सराहना की।  

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