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चिंता: देश में 72% क्षेत्रों से गिद्ध गायब, एनजीटी ने लिया स्वतः संज्ञान; पर्यावरण मंत्रालय से मांगा जवाब

Thu, 04 Dec 2025 05:08 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 04 Dec 2025 05:08 AM IST
सार

देश में तेजी से घटती गिद्धों की संख्या पर एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पर्यावरण मंत्रालय समेत चार संस्थाओं से जवाब मांगा। रिपोर्टों के अनुसार, गिद्धों की मौजूदगी 425 से घटकर सिर्फ 67 स्थानों तक सिमट गई है।

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NGT Seeks Response from Environment Ministry as Vulture Population Drops Sharply Across India
गिद्धों का भी सुरक्षित आशियाना। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में तेजी से कम हो रही गिद्धों की आबादी पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्वतः संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी अध्यक्ष प्रकाश श्रीवास्तव, विशेष सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल और न्यायिक सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि यह मामला जैव विविधता अधिनियम, 2002 के उल्लंघन से जुड़ा हो सकता है और पर्यावरण मानकों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का हवाला भी दिया, जिसमें एनजीटी को स्वतः संज्ञान लेने की शक्ति प्राप्त है।

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एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय, महानिदेशक वन (वन्यजीवन), वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को पक्षकार बनाते हुए सभी से अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले शपथपत्र के रूप में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 26 फरवरी, 2026 को होगी।
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देशभर में किए गए सर्वे बताते हैं कि पहले जहां 425 स्थानों पर गिद्ध दिखते थे, वहीं अब उनकी मौजूदगी मात्र 67 जगहों तक सीमित रह गई है यानी 72 फीसदी क्षेत्रों से यह महत्वपूर्ण प्रजाति पूरी तरह गायब हो चुकी है। एनजीटी ने इस मामले को मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान में लिया था। अदालत ने वन महानिदेशक (वन्यजीव), वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआई) को भी अपना-अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। 

नए अध्ययन से सामने आया बड़ा खुलासा
बंगलूरू स्थित एनसीबीएस–टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, कर्नाटक वल्चर कंजर्वेशन ट्रस्ट, बीएनएचएस, यूनिवर्सिटी ऑफ केम्ब्रिज और ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक विस्तृत अध्ययन किया।यह अध्ययन इस धारणा को चुनौती देता है कि संरक्षित क्षेत्रों के भीतर गिद्ध डाइक्लोफेनैक के असर से सुरक्षित रहते हैं। अध्ययन के अनुसार हिमाचल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के संरक्षित व गैर-संरक्षित क्षेत्रों से 642 मल-नमूने एकत्र किए गए। डीएनए विश्लेषण से 419 नमूनों में गिद्धों की प्रजातियों और उनके आहार पैटर्न की सटीक पहचान की गई।

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