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एनजीटी ने सीपीसीबी से कहा- कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों को कम करने की कार्ययोजना करें तैयार
Fri, 26 Jun 2020 10:51 PM IST
Rohit Ojha
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rohit Ojha
Updated Fri, 26 Jun 2020 10:51 PM IST
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एनजीटी
- फोटो : सोशल मीडिया
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को मानव स्वास्थ्य और मिट्टी पर पड़ने वाले कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों को कम करने संबंधी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीपीसीबी को राज्यों के प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के साथ समन्वय स्थापित कर इस योजना को पूरा करने को कहा।
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एनजीटी ने सीपीसीबी से कहा कि इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त प्राटोकॉल विकसित जा सकता है और चार महीने के भीतर इसे संबंधित एजेंसियों को वितरित किया जा सकता है। कृषि मंत्रालय ने एनजीटी को अवगत कराया कि कीटनाशकों के गैर-विवेकपूर्ण और अंधाधुध उपयोग का मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है, जिसके बाद यह आदेश सामने आया है।
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मंत्रालय ने एनजीटी को बताया कि केंद्र एवं राज्य सरकारें विभिन्न कार्यक्रम के जरिए उपयोगकर्ताओं को कीटनाशकों के सुरक्षित और विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर प्रशिक्षण देती हैं और वह लगातार खाद्य पदार्थों में कीटनाशक के अवशेषों की निगरानी कर रहा है। एनजीटी ने मंत्रालय के जवाब का उल्लेख करते हुए कहा, 'जबकि मानव स्वास्थ्य और मिट्टी पर कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों को कम करने को लेकर निश्चित कदम उठाए जा रहे हैं, सीपीसीबी द्वारा संयुक्त रूप से राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय स्थापित कर एक कार्ययोजना विकसित करके निगरानी बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।'
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एनजीटी पत्रकार शैलेश सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की थी क्योंकि इससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है और मिट्टी दूषित होती है। याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के एक अध्ययन और समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का हवाला दिया था।