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एनजीटी ने फिलहाल चारधाम परियोजना पर लगाई ब्रेक
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Tue, 13 Mar 2018 04:21 AM IST
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चार धाम
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उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री व यमुनोत्री को मिलाने वाली चारधाम परियोजना को अलग-अलग टुकड़ों में बांटकर किया जा रहा काम फिलहाल रुका रहेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय व अन्य पक्षों से कहा है कि वह अगली सुनवाई तक स्पष्ट जवाब दाखिल करें। जस्टिस जावद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने सिटिजन फॉर ग्रीन दून की याचिका पर यह आदेश दिया है। एनजीटी में यह याचिका सुशीला भंडारी, उमा जोशी, केशर सिंह पवार, नरेंद्र पोखरियाल, दीपक चंद रमोला, स्वामी संविदानंद की ओर से दाखिल की गई है।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय सड़क एवं परिवहन व राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि उनकी ओर से पेड़ काटने के लिए वन मंजूरी ली गई है लेकिन बाद में अधिवक्ता अपने बयान से मुकरने लगे। पीठ ने कहा कि वे 20 मार्च तक का समय देते हैं इस दौरान वे अपना स्पष्ट जवाब दाखिल करें। वहीं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया।
याचियों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर तो चारधाम परियोजना के कामकाज का बोर्ड लगा है लेकिन परियोजना निर्माण मंजूरी वाले कागजों में ऐसा कुछ नहीं है।
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सुनवाई के दौरान केंद्रीय सड़क एवं परिवहन व राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि उनकी ओर से पेड़ काटने के लिए वन मंजूरी ली गई है लेकिन बाद में अधिवक्ता अपने बयान से मुकरने लगे। पीठ ने कहा कि वे 20 मार्च तक का समय देते हैं इस दौरान वे अपना स्पष्ट जवाब दाखिल करें। वहीं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया।
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याचियों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर तो चारधाम परियोजना के कामकाज का बोर्ड लगा है लेकिन परियोजना निर्माण मंजूरी वाले कागजों में ऐसा कुछ नहीं है।
इतनी बड़ी परियोजना के लिए सिर्फ वन मंजूरी नाकाफी
चारधाम परियोजना कुल 900 किलोमीटर की है। अब तक वन क्षेत्र में 356 किलोमीटर परियोजना के चौड़ीकरण का काम किया जा चुका है। वहीं इसके लिए 25,303 पेड़ काटे जा चुके हैं। अभी 544 किलोमीटर शेष है। ऐसे में आगे और पेड़ों की कटाई होगी। वनों को नुकसान होगा। जबकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए सिर्फ वन मंजूरी नाकाफी है।
पर्यावरणीय मानकों और नियमों से बचने के लिए छोटे-छोटे टुकड़ों में सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। जबकि 100 किलोमीटर या उससे अधिक परियोजना में वन मंजूरी के अलावा पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन और पर्यावरण मंजूरी की जरूरत होती है।
याचिका के मुताबिक चारधाम परियोजना में ऋषिकेश से धरासू (एनएच 94), धरासु से यमुनोत्री, धरासु से गंगोत्री, ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग, रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड (केदारनाथ), रुद्रप्रयाग से माना गांव (बद्रीनाथ), टनकपुर से पिथौरागढ़ तक विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण और उन्हें जोड़ा जाना है।
पर्यावरणीय मानकों और नियमों से बचने के लिए छोटे-छोटे टुकड़ों में सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। जबकि 100 किलोमीटर या उससे अधिक परियोजना में वन मंजूरी के अलावा पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन और पर्यावरण मंजूरी की जरूरत होती है।
याचिका के मुताबिक चारधाम परियोजना में ऋषिकेश से धरासू (एनएच 94), धरासु से यमुनोत्री, धरासु से गंगोत्री, ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग, रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड (केदारनाथ), रुद्रप्रयाग से माना गांव (बद्रीनाथ), टनकपुर से पिथौरागढ़ तक विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण और उन्हें जोड़ा जाना है।