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एनजीटी ने मांगा स्वच्छ गंगा पर किए गए खर्च का हिसाब

Wed, 27 Jul 2016 03:55 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 27 Jul 2016 03:55 AM IST
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NGT has sought details of expenses incurred on Clean Ganga

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को गंगा की सफाई के लिए तय 20 हजार करोड़ रुपये के बजट से अभी तक आवंटित या खर्च किए गए फंड का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया है।

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पीठ ने कहा कि गंगा के पुनरुद्धार व संरक्षण का काम करने वाली एजेंसी एनएमसीजी ट्रिब्यूनल को यह बताए कि उसने बजट से फंड किन परियोजनाओं को आवंटित किया है। वहीं प्रधान पीठ ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को नोटिस जारी कर तीनों राज्यों से अगली सुनवाई तक एक्शन प्लान भी पेश करने का निर्देश दिया है।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को एमसी मेहता मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि तीनों राज्य यह भी बताएं कि बत अपने अधिकार क्षेत्र में गंगा व उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। 
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पीठ ने कहा कि सभी प्राधिकरण दस दिनों के भीतर अपने जवाब दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त से रोजाना की जाएगी। प्रधान पीठ ने उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिकारियों व एनएमसीजी के निदेशक को भी अगली सुनवाई में तलब किया है। पीठ ने कहा कि दोनों राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव व अन्य संबंधित प्राधिकरणों के सचिव स्तर अधिकारी मौजूद होने चाहिए। 

पीठ ने प्रदूषण फैलाने वाली गंभीर औद्योगिक ईकाइयों और संबंधित प्राधिकरणों से भी कहा है कि अगली सुनवाई में सभी स्पष्ट जानकारी दें कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें टैनरी, पेपर व पल्प, टेक्सटाइल, डिस्टलरी व अन्य उद्योग शामिल हैं।

पीठ ने कहा कि तथ्यों और दलीलों के अभाव में हरिद्वार से कानपुर तक गंगा क्षेत्र के लिए अभी तक फैसला नहीं सुनाया जा सका है। यह मामला काफी दिनों से लंबित है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसलिए प्राधिकरण जल्द से जल्द अपने जवाब दाखिल करें।  


बीते वर्ष सरकार ने नमामि गंगे कार्यक्रम के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था। मालूम हो कि नदी संरक्षण के लिए पिछले तीन दशकों में पैसे का खर्च चार गुना ज्यादा हो चुका है। वहीं नमामि गंगे कार्यक्रम को एनएमसीजी और राज्यों में मौजूद प्रबंधन समूहों के जरिए लागू किया जा रहा है। एनजीटी चार चरणों में स्वच्छ गंगा मामले की सुनवाई कर रहा है। 

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