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NGT: अवैध रेत खनन पर एनजीटी का सख्त रुख, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियामक ढांचा बनाने का निर्देश
Tue, 21 Jul 2026 06:56 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 21 Jul 2026 06:56 PM IST
सार
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निजी कृषि भूमि से रेत हटाने की आड़ में होने वाले अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने वैज्ञानिक निगरानी के लिए सैटेलाइट चित्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया। पर्यावरण मंत्रालय को इसरो के साथ मिलकर तकनीकी विकल्पों का अध्ययन कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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एनजीटी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अवैध रेत खनन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बड़ा निर्देश दिया है। एनजीटी ने कहा कि वे ऐसा व्यापक नियामक ढांचा तैयार करें, जिससे मानसून के बाद निजी कृषि भूमि से रेत हटाने के नाम पर किए जाने वाले अवैध व्यावसायिक खनन पर रोक लगाई जा सके।
इस मुद्दे से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने रेत के जमाव और निकासी की निगरानी के लिए उपग्रह चित्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हुई सुनवाई
17 जुलाई के आदेश, जिसे मंगलवार को सार्वजनिक किया गया, में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में अधिकरण को उन सरकारी अधिसूचनाओं और नियमों की जांच करने का निर्देश दिया था, जिनके तहत कृषि भूमि से रेत हटाने की अनुमति दी जाती है। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इन प्रावधानों के दुरुपयोग से होने वाले ऊपरी उपजाऊ मिट्टी के कटाव और अवैध खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर चिंता जताई थी।
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राज्यों से चर्चा के बाद तैयार हुआ ढांचा
एनजीटी ने कहा कि प्रभावी निगरानी के लिए उसने पहले भी कुछ निर्देश जारी किए थे। इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने मई 2026 में शपथपत्र दाखिल कर बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परामर्श के बाद एक रूपरेखा तैयार की गई है।
पीठ ने कहा कि मंत्रालय के शपथपत्र के अनुसार, वर्ष 2026 में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने माना था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भौगोलिक और स्थलाकृतिक अंतर को देखते हुए एक समान व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है।
विशेषज्ञ समिति ने दिए कई सुझाव
ईएसी ने प्राकृतिक भूमि की संरचना को सुरक्षित रखने, प्राकृतिक सतह से नीचे खुदाई या खनन पर रोक लगाने, रेत के जमाव का आकलन करने, अवैध खनन रोकने के उपाय करने, वैज्ञानिक मूल्यांकन और निगरानी प्रणाली विकसित करने, वास्तविक समय में निगरानी लागू करने तथा रेत हटाने के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने जैसी कई सिफारिशें की हैं।
एनजीटी ने कहा, "मानसून के बाद कृषि भूमि से रेत हटाने का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने और यह देखने के लिए कि रेत हटाने के नाम पर कहीं अवैध खनन न हो, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा तैयार किए गए ढांचे के भीतर नियामक व्यवस्था विकसित करनी होगी।" अधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मंत्रालय की रूपरेखा के अनुरूप आवश्यक नियम तैयार करने का निर्देश दिया।
एआई और सैटेलाइट से होगी निगरानी
एनजीटी ने कहा कि कृषि भूमि से रेत हटाने की आड़ में होने वाले अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए नवीनतम वैज्ञानिक और तकनीकी साधनों का उपयोग जरूरी है। अधिकरण ने कहा, "मानसून से पहले और बाद के उपग्रह चित्रों का उपयुक्त सॉफ्टवेयर या एआई उपकरणों की मदद से विश्लेषण किया जा सकता है, ताकि कृषि भूमि में रेत के जमाव का पता लगाया जा सके। साथ ही यह भी देखा जाए कि रेत की अनुमानित मात्रा का आकलन किया जा सकता है या नहीं और निकासी के बाद निकाली गई वास्तविक मात्रा का भी मिलान किया जा सके।"
इसरो के साथ विकल्प तलाशेगा पर्यावरण मंत्रालय
एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ मिलकर इस संबंध में विकल्प तलाशने और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मामले में पक्षकार बनाते हुए उनसे तैयार किए गए नियामक ढांचे के साथ अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
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इस मुद्दे से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने रेत के जमाव और निकासी की निगरानी के लिए उपग्रह चित्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हुई सुनवाई
17 जुलाई के आदेश, जिसे मंगलवार को सार्वजनिक किया गया, में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में अधिकरण को उन सरकारी अधिसूचनाओं और नियमों की जांच करने का निर्देश दिया था, जिनके तहत कृषि भूमि से रेत हटाने की अनुमति दी जाती है। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इन प्रावधानों के दुरुपयोग से होने वाले ऊपरी उपजाऊ मिट्टी के कटाव और अवैध खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर चिंता जताई थी।
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राज्यों से चर्चा के बाद तैयार हुआ ढांचा
एनजीटी ने कहा कि प्रभावी निगरानी के लिए उसने पहले भी कुछ निर्देश जारी किए थे। इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने मई 2026 में शपथपत्र दाखिल कर बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परामर्श के बाद एक रूपरेखा तैयार की गई है।
पीठ ने कहा कि मंत्रालय के शपथपत्र के अनुसार, वर्ष 2026 में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने माना था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भौगोलिक और स्थलाकृतिक अंतर को देखते हुए एक समान व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है।
विशेषज्ञ समिति ने दिए कई सुझाव
ईएसी ने प्राकृतिक भूमि की संरचना को सुरक्षित रखने, प्राकृतिक सतह से नीचे खुदाई या खनन पर रोक लगाने, रेत के जमाव का आकलन करने, अवैध खनन रोकने के उपाय करने, वैज्ञानिक मूल्यांकन और निगरानी प्रणाली विकसित करने, वास्तविक समय में निगरानी लागू करने तथा रेत हटाने के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने जैसी कई सिफारिशें की हैं।
एनजीटी ने कहा, "मानसून के बाद कृषि भूमि से रेत हटाने का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने और यह देखने के लिए कि रेत हटाने के नाम पर कहीं अवैध खनन न हो, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा तैयार किए गए ढांचे के भीतर नियामक व्यवस्था विकसित करनी होगी।" अधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मंत्रालय की रूपरेखा के अनुरूप आवश्यक नियम तैयार करने का निर्देश दिया।
एआई और सैटेलाइट से होगी निगरानी
एनजीटी ने कहा कि कृषि भूमि से रेत हटाने की आड़ में होने वाले अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए नवीनतम वैज्ञानिक और तकनीकी साधनों का उपयोग जरूरी है। अधिकरण ने कहा, "मानसून से पहले और बाद के उपग्रह चित्रों का उपयुक्त सॉफ्टवेयर या एआई उपकरणों की मदद से विश्लेषण किया जा सकता है, ताकि कृषि भूमि में रेत के जमाव का पता लगाया जा सके। साथ ही यह भी देखा जाए कि रेत की अनुमानित मात्रा का आकलन किया जा सकता है या नहीं और निकासी के बाद निकाली गई वास्तविक मात्रा का भी मिलान किया जा सके।"
इसरो के साथ विकल्प तलाशेगा पर्यावरण मंत्रालय
एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ मिलकर इस संबंध में विकल्प तलाशने और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मामले में पक्षकार बनाते हुए उनसे तैयार किए गए नियामक ढांचे के साथ अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।