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NGT: देरी से आई रिपोर्ट-जवाब पर एनजीटी सख्त, रिकॉर्ड पर लेने के लिए जुर्माना लगाने का दिया निर्देश
Wed, 07 Jan 2026 07:09 PM IST
लव गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Wed, 07 Jan 2026 07:09 PM IST
सार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने देरी से आई रिपोर्ट और जवाबों को रिकॉर्ड पर लेने के लिए जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने जोर दिया कि ऐसी देरी से आई रिपोर्ट को उसके स्पष्ट निर्देश के बिना रिकॉर्ड पर नहीं रखा जा सकता।
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एनजीटी की फाइल फोटो
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विस्तार
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार (07 जनवरी) को स्पष्ट किया कि तय समय-सीमा के बाद दाखिल किए गए किसी भी दस्तावेज चाहे वह जवाब हो या रिपोर्ट को अब जुर्माना जमा कराने के बाद ही रिकॉर्ड पर लिया जाएगा। एनजीटी ने देरी से आई रिपोर्ट और जवाबों को रिकॉर्ड पर लेने के लिए जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है।
एनजीटी की सख्ती, अब जुर्माने का आदेश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्ती के साथ कहा कि तय समय के बाद फाइल किए गए किसी भी दस्तावेज, जिसमें जवाब और रिपोर्ट शामिल हैं, उनको केवल जुर्माना भरने के बाद ही रिकॉर्ड पर लिया जाएगा। हरियाणा में पर्यावरणीय उल्लंघन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने पाया कि संयुक्त समिति नवंबर 2025 तक अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने में विफल रही, जबकि इस संबंध में पहले ही निर्देश दिए जा चुके थे।
न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल की ओर से तय समय-सीमा के बावजूद पक्षकार और समितियां देरी से जवाब या रिपोर्ट दाखिल कर रही हैं, जिससे अनावश्यक स्थगन होता है और न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में असाधारण परिस्थितियां हों, तो संबंधित पक्ष या समिति समय बढ़ाने की मांग कर सकती है या देरी माफी की अर्जी के साथ रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।
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निर्धारित जुर्माना जमा कराया जाए
पीठ ने आगे साफ शब्दों में कहा कि देरी से दाखिल की गई रिपोर्ट को बिना स्पष्ट अनुमति के रिकॉर्ड पर नहीं रखा जा सकता। ऐसी रिपोर्ट तभी स्वीकार की जाएंगी, जब देरी, असुविधा और अनावश्यक स्थगन के लिए निर्धारित जुर्माना जमा कराया जाएगा।
ये भी पढ़ें: Aviation: इंडिगो का लंबी दूरी का नया हथियार, दिल्ली में उतरा A321XLR विमान; जानिए खासियत
ट्रिब्यूनल ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि विलंबित रिपोर्टों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए कि तय समय के बाद दाखिल किए गए काउंटर एफिडेविट, फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट, जवाब या अन्य दस्तावेज जुर्माना भुगतान के अधीन ही रिकॉर्ड पर लिए जाएंगे। साथ ही, मामले की सुनवाई के समय जुर्माने का स्पष्ट उल्लेख भी किया जाए। यह फैसला मामलों के समयबद्ध निपटारे और न्यायिक प्रक्रिया में अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में न्यायाधिकरण का अहम कदम माना जा रहा है।
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एनजीटी की सख्ती, अब जुर्माने का आदेश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्ती के साथ कहा कि तय समय के बाद फाइल किए गए किसी भी दस्तावेज, जिसमें जवाब और रिपोर्ट शामिल हैं, उनको केवल जुर्माना भरने के बाद ही रिकॉर्ड पर लिया जाएगा। हरियाणा में पर्यावरणीय उल्लंघन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने पाया कि संयुक्त समिति नवंबर 2025 तक अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने में विफल रही, जबकि इस संबंध में पहले ही निर्देश दिए जा चुके थे।
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न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल की ओर से तय समय-सीमा के बावजूद पक्षकार और समितियां देरी से जवाब या रिपोर्ट दाखिल कर रही हैं, जिससे अनावश्यक स्थगन होता है और न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में असाधारण परिस्थितियां हों, तो संबंधित पक्ष या समिति समय बढ़ाने की मांग कर सकती है या देरी माफी की अर्जी के साथ रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।
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निर्धारित जुर्माना जमा कराया जाए
पीठ ने आगे साफ शब्दों में कहा कि देरी से दाखिल की गई रिपोर्ट को बिना स्पष्ट अनुमति के रिकॉर्ड पर नहीं रखा जा सकता। ऐसी रिपोर्ट तभी स्वीकार की जाएंगी, जब देरी, असुविधा और अनावश्यक स्थगन के लिए निर्धारित जुर्माना जमा कराया जाएगा।
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ट्रिब्यूनल ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि विलंबित रिपोर्टों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए कि तय समय के बाद दाखिल किए गए काउंटर एफिडेविट, फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट, जवाब या अन्य दस्तावेज जुर्माना भुगतान के अधीन ही रिकॉर्ड पर लिए जाएंगे। साथ ही, मामले की सुनवाई के समय जुर्माने का स्पष्ट उल्लेख भी किया जाए। यह फैसला मामलों के समयबद्ध निपटारे और न्यायिक प्रक्रिया में अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में न्यायाधिकरण का अहम कदम माना जा रहा है।
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