NFSU: बलात्कार के अपराधी को 23 दिन में सजा, 1.5 करोड़ आरोपियों के फिंगर प्रिन्ट तैयार
गृह मंत्री ने कहा कि यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि ट्रायल में टेक्निकल एविडेंस को मान्यता दी गई। साथ ही, पूरे देश के डिजिटल सिस्टम को डिजिटाइज करने का प्रयास किया गया है। आज देश में अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से 100 प्रतिशत पुलिस स्टेशन कम्प्युटराइज हो चुके हैं।
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय न्यायालयिक विज्ञान सम्मेलन 2025 को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। शाह ने कहा, देश में अभी दोषसिद्धि दर 54 प्रतिशत है। नए कानूनों में आतंकवाद को परिभाषित किया गया है। वॉयस लॉग और डिजिटल वॉइस मेल को भी स्थान दिया गया है। बीएनएसएस में ऑडियो, वीडियो रिकॉर्डिंग, फॉरेंसिक साक्ष्य की वीडियोग्राफी और पूछताछ में डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी आधार देने की भी व्यवस्था की गई है। पुलिस, अभियोजन और न्यायिक तंत्र के लिए समय-सीमा तय कर निर्धारित अवधि में न्याय सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम भी मिलने लगे हैं। कुछ मामलों में बलात्कार के अपराधी को 23 दिन में सजा हो गई और 100 दिन के अंदर ट्रिपल मर्डर केस को सुलझा कर दोषी को सजा दे दी गई है।
गृह मंत्री ने कहा कि यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि ट्रायल में टेक्निकल एविडेंस को मान्यता दी गई। साथ ही, पूरे देश के डिजिटल सिस्टम को डिजिटाइज करने का प्रयास किया गया है। आज देश में अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से 100 प्रतिशत पुलिस स्टेशन कम्प्युटराइज हो चुके हैं। लगभग 14 करो़ड़ 19 लाख एफआईआर और उनसे जुड़े दस्तावेज लेगेसी डेटा के साथ ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं। 22 हजार अदालतों को ई-कोर्ट सुविधा से लैस किया गया। 2 करोड़ 19 लाख का डेटा ई-प्रिज़न के माध्यम से उपलब्ध है। 1 करोड़ 93 लाख केसों का अभियोजन डेटा, ई-प्रॉसिक्यूशन के माध्यम से उपलब्ध है। 39 लाख फॉरेंसिक साक्ष्य ई-फॉरेंसिक के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि इससे 16 लाख अलर्ट जनरेट हो चुके हैं। राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) में 1 करोड़ 53 लाख आरोपियों के फिंगर प्रिन्ट उपलब्ध हैं। ये फिंगरप्रिंट हर पुलिस स्टेशन के साथ साझा किए गए हैं। National Database of Human Trafficking Offender भी उपलब्ध है। यह सारा डेटा अभी अलग-अलग है, लेकिन गृह मंत्रालय अगले कुछ वर्षों में आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेन्स का उपयोग करके यह डेटा जांच से जुड़ी टीमों को सौंप देगा। उन्होंने कहा कि तब क्राइम रोकने की रणनीति बनानी बहुत सरल हो जाएगी और क्राइम कंट्रोल करने में भी बहुत फायदा होगा।
अमित शाह ने कहा कि हमें सात साल से अधिक सजा वाले हर क्राइम सीन को विजिट करने के लिए 30 हजार लोग चाहिए। फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षण लेकर हर साल 36 हजार लोग निकलेंगे, जिनमें कई लोग प्राइवेट फॉरेंसिक लैब्स में भी काम करेंगे। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय, प्राइवेट और सरकारी फ़ोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) के बीच एक अनुबंध भी तैयार कर रहा है, जिससे कुछ एफएसएल में आए सैम्पल का विश्लेषण करने के लिए हम प्राइवेट लैबोरेट्री का भी उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि NFSU ड्रोन फॉरेंसिक, स्मार्ट सिटी फॉरेंसिक, मरीन फॉरेंसिक, कॉर्पोरेट फॉरेंसिक जैसी कई नई विधाओं में भी आगे बढ़ रही है। एनएएफआईएस का इंटरनेशनल आउटरीच भी बढ़ रहा है। अभी लगभग 240 विदेशी छात्र एनएएफआईएस में पढ़ाई कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इसका दुनियाभर में भी विस्तार होगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आदतन अपराधियों, परिस्थितिवश बने अपराधियों और जरूरत के कारण अपराध कर बैठे अपराधियों का वर्ग बनाया जाना चाहिए और जेल के अंदर ही मनोवैज्ञानिक परामर्श देकर उन्हें अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि समाज में हमारे कैदियों के पुनर्वास लिए हम फॉरेंसिक साइंस के आधार पर कोई अच्छी सुविधा खड़ी कर पाएंगे। अगले 1-2 साल में मोदी जी के नेतृत्व में हम यह प्रयास करेंगे। श्री शाह ने कहा कि एक Modus Operandi Bureau बनाया गया है, जिससे अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी।
शाह ने कहा, फॉरेंसिक साइंस के बगैर समय पर न्याय दिलवाना और दोषसिद्धि की दर बढ़ाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के समय में अपराध का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। अब अपराधी तकनीक, सूचना एवं संचार के अलग-अलग माध्यमों का उपयोग करते हैं, जिससे अपराध अब सीमा रहित हो गया है। पहले क्राइम किसी जिले, राज्य या देश के किसी छोटे से हिस्से में होता था, लेकिन अब क्राइम बॉर्डरलेस हो चुका है। क्राइम अब शहर, राज्य और देश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को भी लांघने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में फॉरेंसिक साइंस का महत्व बहुत बढ़ गया है। शाह ने कहा कि मोदी जी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वे गृह मंत्री थे, तब मोदी जी ने 2009 में गुजरात फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का जो पौधा लगाया था आज वह नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी वटवृक्ष के रूप में दुनिया में अपनी तरह की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए हर्ष का विषय है कि 1 अक्टूबर 2020 को जब नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई, उस वक्त मोदी जी प्रधानमंत्री और वह देश के गृह मंत्री थे।