{"_id":"60e7615a8ebc3ebc7b56b23e","slug":"news-portal-said-high-court-that-new-it-laws-attack-freedom-of-expression","type":"story","status":"publish","title_hn":"याचिका: न्यूज पोर्टल ने हाईकोर्ट से कहा, नया आईटी कानून अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
याचिका: न्यूज पोर्टल ने हाईकोर्ट से कहा, नया आईटी कानून अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला
Fri, 09 Jul 2021 02:04 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 09 Jul 2021 02:04 AM IST
सार
देशभर की विभिन्न अदालतों में इस मामले को लेकर कुल 10 याचिकाएं दायर की गई हैं
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
डिजिटल न्यूज पोर्टल ‘द लीफलेट’ ने बृहस्पतिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि नया सूचना प्रद्यौगिकी (मध्यवर्ती दिशनिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम-2021 अभिव्यक्ति की आजादी के मूलभूत अधिकार पर हमला है।
विज्ञापन
पोर्टल ने पिछले सप्ताह याचिका दायर कर नए आईटी नियमों को चुनौती देते हुए दावा किया कि यह संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता), 19ए (भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी), 19 (1)(जी) (कोई भी पेशा करने, या नौकरी, व्यापार करने की आजादी) का उल्लंघन करता है।
विज्ञापन
न्यूज पोर्टल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डैरियस खम्बाटा ने बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की पीठ से कहा कि इन नियमों का नकारात्मक असर मौलिक अधिकारों पर पड़ता है, जिसकी गारंटी संविधान में दी गई हैं। उन्होंने कहा, वे (नियम) बोलने की आजादी के मूलभूत अधिकार पर हमला करते हैं।
विज्ञापन
नियम कहता है कि अगर समाचार संगठन आचार संहिता का अनुपालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई हो सकती है। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने पीठ से कहा कि देशभर की विभिन्न अदालतों में इस मामले को लेकर कुल 10 याचिकाएं दायर की गई हैं।
इसलिए, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सभी याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया, इस मामले पर 9 जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।
इसके बाद हाईकोर्ट ने ‘द लीफलेट’ की याचिका पर सुनवाई 16 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी। वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने भी नियमों के मनमाना और गैर कानूनी होने का दावा करते हुए जनहित याचिका दायर की है।