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सुप्रीम कोर्ट का नया रोस्टर जारी, जनहित याचिकाओं पर खुद सुनवाई करेंगे सीजेआई रंजन गोगोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 03 Oct 2018 09:38 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
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देश के नए मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेने के साथ ही जस्टिस रंजन गोगोई ने मामलों की तत्काल सुनवाई की परंपरा में बड़ा बदलाव किया। चीफ जस्टिस ने कहा कि जब तक किसी को फांसी पर न चढ़ाया जा रहा हो या घर से निकाला नहीं जा रहा हो, मामले की तत्काल सुनवाई नहीं होगी।
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सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई के शुरुआती 20 मिनट तत्काल सुनवाई के लिए आरक्षित रखे जाते हैं। शपथ लेने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब तक मानदंड तय नहीं कर लिए जाते, तब तक मामलों की तत्काल सुनवाई के उल्लेख की अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर कल किसी को फांसी दी जा रही हो या बेघर किया जा रहा हो, तो हम अति आवश्यकता समझ सकते हैं। अन्यथा पहले याचिका दायर की जाएगी। बहुत जरूरी मामला हुआ तो ही सुनवाई की जाएगी। मालूम हो कि पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने भी इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मौखिक उल्लेख करने पर रोक लगा दी थी और सिर्फ एटवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) ही मौखिक उल्लेख कर सकते थे।
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पहले दिन ही रोस्टर तय किया
चीफ जस्टिस ने जजों के काम के बंटवारे का बुधवार को ही नया रोस्टर भी जारी कर दिया। जनहित, चुनाव, कोर्ट की अवमानना, सामाजिक न्याय, आपराधिक मामले और संवैधानिक पदों पर नियुक्ति से संबंधित याचिकाओं पर चीफ जस्टिस सुनवाई करेंगे। साथ ही सेबी, रिजर्व बैंक, कंपनी कानून और बीमा से जुड़े मामले भी उनके पीठ के पास रहेंगे।
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जस्टिस एमबी लोकुर
वरिष्ठता में दूसरे स्थान पर जस्टिस लोकुर की पीठ उन्हीं जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी जो मुख्य न्यायाधीश उनके पास भेजेंगे। साथ ही पीठ पहले से आवंटित सामाजिक न्याय, वन, पर्यावरण, जंगली जीवन और पारिस्थितिकी से संबंधित मामलों की सुनवाई जारी रखेगी। व्यक्तिगत कानून मामलों, धार्मिक धर्मार्थ अनुमोदन और खानों, खनिजों और खनन पट्टे से जुड़े मामले भी उनकी पीठ के पास रहेंगे।
जस्टिस कुरियन जोसेफ
तीसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस जोसेफ कुरियन की पीठ के पास श्रम, किराया, सेवा, परिवार और आपराधिक मामलों से संबंधित मामले होंगे। इसके साथ ही धार्मिक और धर्मार्थ अनुमोदन के साथ सामान्य, नागरिक, व्यक्तिगत कानून, सरल धन और बंधक, भूमि कानून, कृषि और किरायेदारी के मामलों और सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और अन्य अदालतों एवं ट्रिब्यूनल से संबंधित मामले भी सौंपे गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, ‘समय कम है और हमें कम समय में बेहतर रिजल्ट देना है। हम यह कोशिश करेंगे कि मुकदमा दर्ज होने और उसकी लिस्टिंग के बीच अंतराल कम हो। हम ऐसा सिस्टम बनाने की कोशिश करेंगे कि केस लिस्ट से न हटाया जाए।’
नंबर गेम
46वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस रंजन गोगोई
13 महीने का कार्यकाल होगा
17 नवंबर 2019 को होंगे रिटायर