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महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़ : परमबीर सिंह के लेटर बम से शिवसेना-एनसीपी की दोस्ती में दरार, बिहार दोहराए जाने के आसार

Sat, 20 Mar 2021 10:54 PM IST
सुरेंद्र जोशी सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 20 Mar 2021 10:54 PM IST
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new twist in the politics of Maharashtra: a rift in Shiv Sena-NCP friendship with Parambir Singhs letter bomb, Bihar likely to repeat
उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख और शरद पवार - फोटो : Amar Ujala

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के लेटर बम से शिवसेना-एनसीपी की दोस्ती में दरार पड़ती दिखाई दे रही है। इससे न केवल एनसीपी बल्कि शिवसेना की छवि को भी बड़ा झटका लगा है। इस पूरी पिक्चर में कांग्रेस गायब है। जाहिर है कि शिवसेना अपनी छवि बचाने के लिए इस चक्रव्यूह से निकलना चाहेगी। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि महाराष्ट्र में बिहार पैटर्न दोहराया जा सकता है।

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देश के शीर्ष उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित निवास एंटीलिया के बाहर जिलेटिन की छड़ों से लदी एक कार बरामद होने के बाद क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) के पूर्व प्रमुख एपीआई सचिन वाजे की गिरफ्तारी से महाराष्ट्र की सियासत में नया नया मोड़ आ गया है। बता दें, बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़कर भाजपा के साथ वापस सरकार बना ली थी। माना जा रहा है कि शिवसेना एक बार पुन: पूर्व सहयोगी पार्टी भाजपा से हाथ मिला सकती है। ऐसे में कांग्रेस-राकांपा अलग-थलग पड़ जाएंगे। 
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शिवसेना की बजाए घिर गई एनसीपी
एंटीलिया मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुरू की तो वाजे की करतूत सामने आने लगी। इस मामले में पूरी तरह से शिवसेना को निशाना बनाया जाने लगा। सचिन वाजे को कोरोना काल के दौरान पिछले जून महीने में बहाल किया गया था। तब से यह माना जा रहा था कि वह शिवसेना का खासमखास है। वहीं, यह भी खबरें चली कि वाजे की बहाली के मुद्दे पर एनसीपी ने विरोध जताया था, लेकिन अब सिंह के पत्र से इससे पूरे प्रकरण में एनसीपी का असली चेहरा सामने आ गया है। 
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अनिल देशमुख के मंत्री पद पर ग्रहण, सरकार के अस्तित्व पर सवाल
बहरहाल लेटर बम से महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के मंत्रिपद पर ग्रहण लग चुका है, लेकिन महाविकास आघाड़ी सरकार के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान लग गया है। इस घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र भाजपा के एक बड़े नेता ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में बिहार पैटर्न दोहराया जा सकता है।

शिवसेना और एनसीपी में बढ़ेगी दूरी

परमबीर सिंह ने अपने पत्र में 100 करोड़ रुपये की वसूली का टार्गेट तय करने के मामले में पूरी तरह से एनसीपी को ही निशाना बनाया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि अनिल देशमुख के इस भ्रष्टाचार के संबंध में शरद पवार और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को भी अवगत कराया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

परमबीर सिंह के तबादले के बाद शिवसेना ने खुलकर उनका बचाव किया है। पार्टी के मुखपत्र में दावा किया गया कि परमबीर सिंह दिल्ली की खास लॉबी के शिकार हुए, लेकिन अब सिंह के पत्र के बाद राजनीतिक परिस्थिति पूरी तरह से बदली हुई नजर आ रही है। इसके बाद शिवसेना और एनसीपी के बीच दोषारोपण की शुरूआत भी हो गई है। इससे दोनो दलों के बीच दूरी बढ़ेगी जिसका पूरा फायदा भाजपा उठाएगी।

100 करोड़ रुपये वसूली की जांच में ईडी कर सकती है एंट्री

गृहमंत्री अनिल देशमुख पर पूर्व पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह द्वारा गंभीर आरोप लगाने के बाद अब इस मामले में केंद्रीय जांच एजेसियों की इंट्री हो सकती है। सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजे गए पत्र की प्रति राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भी भेजी है।

वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की है। फडणवीस की इस मांग से समझा जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले की जांच में शामिल हो सकता है।

किरीट सोमैया ने किया यह तंज

इस बीच भाजपा नेता किरीट सोमैया ने तंज करते हुए कहा कि अब समझ में आया कि सचिन वाजे अपनी कार में नोट गिनने वाली मशीन लेकर क्यों घूमता था?

यह भी पढ़ें : पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर का बड़ा आरोप, वाजे से गृहमंत्री मांग रहे थे हर महीने 100 करोड़

यह भी पढ़ें : भाजपा बोली- महाराष्ट्र सरकार चला रही जबरन वसूली रैकेट, गृहमंत्री देशमुख इस्तीफा दें


 

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