फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   New normal: increased burden of stress on women, stay away from stress

न्यू नॉर्मल: महिलाओं पर बढ़ा तनाव का बोझ, तनाव से रहें दूर

Tue, 03 Nov 2020 07:34 AM IST
Kuldeep Singh मनीष कुमार सिंह, नई दिल्ली 
मनीष कुमार सिंह, नई दिल्ली  Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 03 Nov 2020 07:34 AM IST
विज्ञापन
New normal: increased burden of stress on women, stay away from stress
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pexels.com

कोरोना महामारी के साथ जिंदगी न्यू नॉर्मल के साथ चल पड़ी है। लेकिन महिलाओं पर महामारी पर का अलग असर पड़ रहा है। कामकाजी महिलाओं के लिए मुश्किल थोड़ी ज्यादा है। घर और दफ्तर के काम के साथ बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी का बोझ बढ़ने से तनाव मन और मस्तिष्क पर हावी होने लगा है जो अच्छा नहीं है।   

विज्ञापन


चिंताजनक: दस में से सात मां निभा रही दोहरी भूमिका, काम संग बच्चे की पढ़ाई की जिम्मेदारी
एम्स नई दिल्ली के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर राजेश सागर की अनुसार, महामारी के दौर में दो में से एक महिला तनाव के दौर से गुजर रही है। कारण जिम्मेदारियां तीन गुनी बढ़ गई है। घर से दफ्तर का काम करना पड़ रहा है। घर का काम अलग है।
विज्ञापन

औसतन हर 10 में से 7 मां बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने की भी जिम्मेदारी उठा रही है। नतीजा यह है कि वह अपने लिए समय नहीं निकाल पा रही है। खुद गुस्सा नहीं देने से मस्तिष्क के भीतर उतरने है। इससे गुस्सा, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, कमजोरी और निराशा स्तर बढ़ेगा। जो मन मस्तिष्क के लिए अच्छा नहीं है। खुद का ध्यान रखें और जीवन में संतुलन बनाए तब मन स्वस्थ रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिम्मेदारियों को आपस में बांटना होगा
प्रोफेसर सागर बताते हैं कि महिला होने का अर्थ यह नहीं है कि घर का काम अकेली करेगी। महिला घरेलू हो या कामकाजी जिम्मेदारियों को आपस में बांटना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि महामारी के दौर में काम का बोझ पहले की तुलना में कई गुना अधिक हुआ है। घर के पुरुषों बच्चों और अन्य कोई सदस्य है तो काम की जिम्मेदारी को सौंपे।

प्राथमिकता को तय करना होगा
प्रो. सागर के अनुसार महामारी के दौर में काम का बोझ बढ़ने के बीच महिलाओं को अपनी प्राथमिकता तय करनी होगी। अपने लिए समय निकालना। होगा खाने-पीने और आराम को करने का समय तय करना होगा। 90 से 95 फीसदी महिलाएं स्वस्थ रहने के लिए इन तीन फार्मूले को अपना नहीं पाती हैं। नतीजन वे कमजोर होती है। आराम न करने से वह हमेशा थकी रहती है जो सेहत के लिए नुकसानदायक है।

हर तरफ से मिलने वाला तनाव घातक
डॉक्टर सागर के मुताबिक, आज कामकाजी महिलाओं को नौकरी सुरक्षित रखने का तनाव है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में आज के समय में घर पर खाना और पैसे का इंतजाम करने का तनाव है। नतीजन खाने का पूरा इंतजाम महिला की जिम्मेदारी है। पुरुषों या घर के बड़े बच्चों के के लिए अब जिम्मेदारी निभाने का वक्त है।

कोई उनके बारे में पूछता तक नहीं
डॉक्टर सागर बताते हैं कि महिलाएं लगातार काम कर रही हैं लेकिन कोई उनका में कुशलक्षेम तक नहीं पूछता। परिजन महिलाओं का संरक्षण पर हाल-चाल ने उनकी मदद करें, तो इससे उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। जो उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।


तीन में से एक मां बच्चे का रख रही ध्यान
वर्कफोर्स कॉन्फिडेंस इंडेक्स की रिपोर्ट के अनुसार, तीन कामकाजी मांओं में से एक बच्चे का पूरा ध्यान रख रही है।  पांच में से सिर्फ एक कामकाजी मां ही ऐसी है जिसके बच्चे का ध्यान परिवार का कोई दूसरा सदस्य रखता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed