समाजवादी पार्टी में नया फ्रंट, मिल रहे बगावत के संकेत
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद रामगोपाल यादव के गढ़ से शुरू हुई सपा की बगावत दूर तलक जाने के संकेत मिल रहे हैं। शह और मात के इस खेल में मोहरा छोटे प्यादे जरूर हैं लेकिन लड़ाई को शिवपाल बनाम रामगोपाल ही माना जा रहा है।
सपा में अभी सब कुछ सामान्य नहीं हैं। गत दिनों इटावा में पार्टी के महासचिव सांसद रामगोपाल यादव ने बयान दिया था कि टिकट वितरण में उनकी भूमिका अहम होगी। इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव ने पहले से घोषित प्रत्याशियों के दनादन टिकट काट कर रामगोपाल यादव के वजूद को सीधी चुनौती दे दी। टिकट काटने के इस सिलसिले के बीच प्रोफेसर रामगोपाल यादव के गढ़ में जिला संगठन को टारगेट कर नए फ्रंट का ऐलान बहुत कुछ संकेत दे रहा है।
चूंकि जिले में नौ दिसंबर को जिला इकाई और फ्रंटल संगठनों की घोषणा की गई। यह घोषणा प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव की संस्तुति पर जिलाध्यक्ष अमोल यादव ने की। संगठन की नई टीम से रामगोपाल यादव को हाशिए पर रखा गया है।
सपा के एक बडे़ नेता के दिल्ली आवास पर कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था
पार्टी सूत्र बताते हैं कि सपा के एक बडे़ नेता के दिल्ली आवास पर कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था। यहीं नए फ्रंट अखिलेश यादव समाजवादी फ्रंट की नींव रखी गई। सैफई परिवार की हाई प्रोफाइल इस जंग में जिला और फ्रंटल संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता को मोहरा बना कर निशाना सीधे शिवपाल यादव पर ही साधा गया है। इससे पहले भी पोस्टर वार में खेमेबंदी यहां साफ दिखाई दी है।
बताते चलें परिवार की जंग के बीच सांसद रामगोपाल यादव को जब पार्टी से बाहर किया गया था तो उनके पुत्र सांसद अक्षय यादव के सफेद पोस्टर जो रामगोपाल यादव के करीबी एमएलसी डा. दिलीप यादव द्वारा लगाए गए थे, सुर्खियों में आए थे।
जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव के तिलकोत्सव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहुंचे थे। इस दौरान लगाए गए पोस्टरों पर सपा के सभी बड़े नेताओं के फोटो थे लेकिन प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव की फोटो नहीं थी।