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कोरोना: दस संक्रमित में एक मधुमेह रोगी की सात दिन में मौत
Wed, 03 Jun 2020 02:48 PM IST
अनिल पांडेय
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
Published by: अनिल पांडेय
Updated Wed, 03 Jun 2020 02:48 PM IST
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PTI
विस्तार
फ्रांस के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मधुमेह और कोरना पीड़ित 1,300 मरीजों पर अध्ययन के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि एक तिहाई मरीजों की 7 दिन बाद मौत हो गई या उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ गई। डायबेटोलॉजी या जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित मरीज की रक्त वाहिकाओं प्रभावित होती है। जिस कारण उसकी जान जाने का खतरा अधिक होता है।
मधुमेह पीड़ित व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य व्यक्ति की तुलना में कमजोर होती है। इम्यूनिटी कम होने के कारण शरीर में संक्रमण का स्तर बढ़ता चला जाता है और स्थिति खराब हो जाती है।
मौत का कारण वायरल लोड बढ़ना
शुगर के कारण रक्त वाहिकाएं पूरी तरह से बंद हो जाती हैं। इस कारण शरीर में कोशिकाओं को रक्त पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है। खासतौर पर संक्रमण को मारने के लिए इस कारण वायरस को शरीर की इम्युनिटी मार नहीं पाती है और समय के साथ शरीर में वायरल लोड बढ़ने से रोगी की मौत हो जाती है।
89% टाइप-टू डायबिटीज मरीज
वैज्ञानिकों का कहना है कि शोध में शामिल 89 फ़ीसदी संक्रमित टाइप-टू डायबिटीज के थे। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि अधिकतर मरीज संक्रमण होने की के 5 दिन बाद आए, जब उनमें लक्षण दिखने लगा इसका मतलब ये कि 10 फीसदी मरीजों की मौत संक्रमण के 2 सप्ताह में हुई।
कई मरीजों की मौत 7 दिन के बाद ही हो गई होगी
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के इंटेंसिव केयर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ डनकैन यंग का कहना है कि कोरोना वायरस में आए बहुत से मधुमेह रोगी 7 दिन के बाद मरे होंगे। वह कहते हैं कि 7 दिन बाद शरीर में वायरल लोड बढ़ा हुआ इस कारण मौत का ग्राफ अधिक होग। सबसे अधिक वे लोग शामिल होंगे, जिनका मधुमेह नियंत्रित नहीं होगा और वजन अधिक होगा।