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असम में नई आबकारी नीति लागू: हेरिटेज शराब को बढ़ावा, स्थानांतरण के लिए सरकारी अनुमति जरूरी; और क्या बदला?

Sat, 13 Jun 2026 11:49 PM IST
Jyoti Bhaskar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Sat, 13 Jun 2026 11:49 PM IST
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New excise policy in Assam heritage liquor Promotion govt permission for transfers what changed know details
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (फाइल) - फोटो : ANI

असम सरकार ने राज्य के आबकारी क्षेत्र में बड़े सुधारों के लिए कदम उठाया है। इसका उद्देश्य हेरिटेज मादक पेय पदार्थों को कानूनी सुरक्षा और व्यावसायिक बढ़ावा देना है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद, आबकारी विभाग ने "असम आबकारी (संशोधन) नियम, 2026" अधिसूचित किए हैं।

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ये नियम आधिकारिक अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से पूरे राज्य में लागू हो गए हैं। नए नियमों में शराब की बिक्री, दुकानों के स्थान और लाइसेंस के स्थानांतरण पर कड़े प्रावधान हैं। अब आईएमएफएल, बीयर और देसी शराब के थोक व खुदरा 'ऑफ' दुकानों को न्यूनतम गारंटीकृत राजस्व (एमजीआर) देना होगा। यह राजस्व वित्तीय वर्ष की चार तिमाहियों में निर्धारित दरों पर वसूला जाएगा। भुगतान न करने पर बकाया राशि पर 10 फीसदी जुर्माना और 1.5 फीसदी मासिक ब्याज लगेगा। दो खुदरा शराब दुकानों के बीच की दूरी के नियम भी सख्त किए गए हैं। कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) में 500 मीटर, अन्य नगर निगमों में 1 किलोमीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में 2 किलोमीटर की दूरी अनिवार्य है। 'ऑफ' दुकानों को 180 मिलीलीटर या उससे अधिक की सीलबंद बोतलों में शराब बेचनी होगी। 'ऑन' दुकानों (बार) को 750 मिलीलीटर की बोतलों का उपयोग करना होगा।
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लाइसेंस स्थानांतरण के नियम
जिले के भीतर (नगर निगम क्षेत्रों को छोड़कर) दुकान स्थानांतरण की अनुमति जिलाधिकारी दे सकते हैं। नगर निगम क्षेत्रों में स्थानांतरण के लिए राज्य सरकार की स्पष्ट अनुमति आवश्यक होगी। ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में शराब की दुकान स्थानांतरित नहीं की जा सकती। अंतर-जिला स्थानांतरण लाइसेंस मिलने के तीन साल के भीतर प्रतिबंधित होगा।
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स्वदेशी पेय और नई श्रेणी
राज्य की जनजातीय आबादी के लिए हेरिटेज मादक पेय क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। पारंपरिक पेय बनाने का लाइसेंस केवल स्थानीय स्वदेशी लोगों या जनजातीय समुदायों को मिलेगा। हेरिटेज शराब माइक्रो-मैन्युफैक्चरिंग का आवेदन शुल्क 25,000 रुपये से घटाकर 15,000 रुपये किया गया है। खुदरा 'वेंड' लाइसेंस शुल्क 5,000 रुपये से घटाकर 500 रुपये कर दिया गया है। 'असम मेड लिकर' नामक नई श्रेणी भी जोड़ी गई है। इसका विनिर्माण लाइसेंस शुल्क एक लाख रुपये और वेंड लाइसेंस शुल्क 50,000 रुपये निर्धारित है।

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