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New Law: ‘नए आपराधिक कानून अधिक दमनकारी’, कपिल सिब्बल ने कहा- सरकार नागरिकों को नियंत्रित करना चाहती है

Fri, 26 Jul 2024 11:57 PM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Fri, 26 Jul 2024 11:57 PM IST
सार

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा है कि सरकार नए कानून के जरिए जनता को नियंत्रित करना चाहती है। साथ ही विपक्ष पर निशाना साध कर उस पर मुकदमा चलाना चाहती है।

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New criminal laws more oppressive, aimed at controlling common citizens
Kapil Sibbal - फोटो : ANI

विस्तार

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा कि नए आपराधिक कानून पिछले कानूनों की तुलना में दमनकारी हैं, जिन्हें सरकार ने बदला है। उन्होंने कहा कि इन कानून का उनद्देश्य नागरिकों को नियंत्रित करना है। 

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 राज्यसभा सांसद ने कहा कि जिस देश में कानून का दुरुपयोग राज्य की कार्यप्रणाली, व्यक्तियों और संस्थाओं को धमकाने के लिए होता है, ऐसे देश में लोकतंत्र नहीं हो सकता है। सिब्बल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएसन के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों में कुछ खामियां हैं। 
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बीएनएस और बीएनएसएस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह  1 जुलाई, 2024 से लागू किए गए हैं। 

सिब्बल ने आगे कहा कि हम एक अधिनायकवादी व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं। नए कानून आपदा के लिए एक आदर्श व्यवस्था है। जिसमें सत्तारूढ़ दल विपक्ष को निशाना बनाने और उन पर मुकदमा चला पाएगी। आपने पिछले कानून की तुलना में कहीं अधिक दमनकारी कानून बनाए हैं। 
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सरकार ने कहा- नए कानून के लिए 43 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया
केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) ने हाल ही में लागू किए गए तीन आपराधिक कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के सिलसिले में 43 हजार 150 अधिकारियों और कर्मियों को प्रशिक्षित किया है।

पहले जानते हैं कि तीन नए आपराधिक कानून क्या हैं? 
1 जुलाई से लागू होने वाले तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनयम हैं। ये कानून क्रमशः भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) और पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनयम की ली है। 12 दिसंबर, 2023 को इन तीन कानूनों में बदलाव का बिल लोकसभा में प्रस्तावित किया गया था। 20 दिसंबर, 2023 को लोकसभा और 21 दिसंबर, 2023 को राज्यसभा से ये पारित हुए। 25 दिसंबर, 2023 को राष्ट्रपति ने तीन विधेयकों को अपनी मंजूरी दी। वहीं 24 फरवरी, 2024 को केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि तीन नए आपराधिक कानून इस साल 1 जुलाई से लागू होंगे।

दस्तावेजों में डिजिटल रिकॉर्ड्स भी शामिल
इन कानूनों में अत्याधुनिकतम तकनीकों को शामिल किया गया है। दस्तावेजों की परिभाषा का विस्तार कर इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड्स, ई-मेल, सर्वर लॉग्स, कम्प्यूटर, स्मार्ट फोन, लैपटॉप्स, एसएमएस, वेबसाइट, लोकेशनल साक्ष्य, डिवाइस पर उपलब्ध मेल और मैसेजेस को कानूनी वैधता दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे अदालतों में लगने वाले कागजों के अंबार से मुक्ति मिलेगी। 


कानूनी प्रक्रिया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वीडियोग्राफी का विस्तार
एफआईआर से केस डायरी, केस डायरी से चार्जशीट और चार्जशीट से जजमेंट तक की सारी प्रक्रिया को डिजिटलाइज करने का प्रावधान इस कानून में किया गया है। अभी सिर्फ आरोपी की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो सकती है, लेकिन अब पूरा ट्रायल, क्रॉस क्वेश्चनिंग सहित, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगा। शिकायतकर्ता और गवाहों का परीक्षण, जांच-पड़ताल और मुकदमे में साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग और उच्च न्यायालय के मुकदमे और पूरी अपीलीय कार्यवाही भी अब डिजिटली संभव होगी। केंद्र सरकार के अनुसार, नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी और इस विषय के देशभर के विद्वानों और तकनीकी एक्सपर्ट्स के साथ चर्चा कर इसे बनाया गया है। सर्च और जब्ती के वक्त वीडियोग्राफी को आवश्यक कर दिया गया है जो केस का हिस्सा होगी और इससे निर्दोष नागरिकों को फंसाया नहीं जा सकेगा। पुलिस द्वारा ऐसी रिकॉर्डिंग के बिना कोई भी चार्जशीट वैध नहीं होगी।


 
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