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Netaji Statue: तेलंगाना से लाए पत्थर से बनी नेताजी की प्रतिमा, जानें इसे बनाने वाले MBA मूर्तिकार के बारे में

Thu, 08 Sep 2022 09:12 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 08 Sep 2022 09:12 PM IST
सार

इस प्रोजेक्ट की तैयारी इस साल जनवरी में शुरू हुई थी। इसके लिए एक मीटिंग में भाग लेने के लिए मूर्तिकार अरुण योगीराज को 8-9 अन्य कलाकारों के साथ बुलाया गया था।

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Netaji statue made of stone brought from Telangana, know about the MBA sculptor Arun Yogiraj who built it
Arun Yogiraj - फोटो : Twitter

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत विजय चौक से इंडिया गेट तक पूरे खंड का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का भी अनावरण किया जिसकी खास चर्चा की जा रही है। यहां नेताजी की 28 फीट ऊंची प्रतिमा लगाई गई है। इसे मैसूर के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने तैयार किया है। 

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सोशल मीडिया पर काफी फैन फॉलोइंग
योगीराज एक जाना-माना नाम हैं और सोशल मीडिया पर उनकी काफी फैन फॉलोइंग है। प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी के बेटे 37 वर्षीय अरुण योगीराज मैसूरु महल के शिल्पकारों के परिवार से आते हैं। अरुण के पिता गायत्री और भुवनेश्वरी मंदिर के लिए भी कार्य कर चुके हैं। एमबीए की पढ़ाई कर चुके योगीराज पांचवीं पीढ़ी के मूर्तिकार हैं। एमबीए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में भी काम किया, लेकिन 2008 में मूर्तिकार बनने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
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जनवरी में हुई थी प्रोजेक्ट की शुरुआत 
इस प्रोजेक्ट की तैयारी इस साल जनवरी में शुरू हुई थी। इसके लिए एक मीटिंग में भाग लेने के लिए मूर्तिकार अरुण योगीराज को 8-9 अन्य कलाकारों के साथ बुलाया गया था। इस बैठक में तय हुआ था कि प्रतिमा को पत्थर से बनाया जाएगा। योगीराज पत्थर की मूर्ति बनाने में माहिर हैं। योगीराज के मुताबिक ये काम आसान नहीं था। पत्थर से इतनी बड़ी मूर्ति को तराशने में कई तरह की मुश्किलें आती हैं। उन्होंने असल प्रतिमा से पहले रेप्लिका तैयार की फिर वास्तविक मूर्ति पर काम शुरू किया गया। ग्रेनाइट की मूर्ति होने के कारण इसे तराशना एक कठिन काम था। 

तेलंगाना से लाया गया था विशाल पत्थर 
280 मीट्रिक टन ग्रेनाइट का ये पत्थर तेलंगाना में एक खदान से प्राप्त किया गया था। पत्थर को दिल्ली भेजने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर अस्थायी सड़क का एक खंड बनाया गया था। इस विशाल पत्थर को तेलंगाना के खम्मम से नई दिल्ली में नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) तक ले जाने के लिए 140 पहियों वाला एक 100 फीट लंबा ट्रक विशेष रूप से डिजाइन किया गया था। इसमें इसने 1,665 किमी की दूरी तय की थी।


प्रतिमा का वजन 280 टन
नेताजी की इस प्रतिमा का वजन 280 टन है और इसे तैयार करने के लिए कई कलाकार कई बार 24-24 घंटे तक काम करते रहे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, मूर्ति को तराशने में 26,000 घंटे से अधिक का समय लगा। योगीराज  के मुताबिक, कई कारणों से बहुत दबाव था। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री को करना था, प्रतिमा को इंडिया गेट पर रखा जाना था और यह एक खास मूर्ति थी इसलिए ये एक मुश्किल काम था। लेकिन आखिरकार उन्होंने इसे सफलतापूर्वक पूरा करके दिखा दिया। 

महाराजा जयचामराजेंद्र वडेयार सहित कई हस्तियों की मूर्ति बनाई 
केदारनाथ में स्थापित आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के निर्माण के अलावा योगीराज ने मैसूरु में महाराजा जयचामराजेंद्र वडेयार की 14.5 फुट की सफेद संगमरमर की प्रतिमा, महाराजा श्री कृष्णराज वाडियार-IV और स्वामी रामकृष्ण परमहंस की सफेद संगमरमर की प्रतिमा भी बनाई है।

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