Subhas Chandra Bose: नेताजी ने ठुकराई थी अंग्रेज अफसर की चाय की पेशकश, जानें सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा किस्सा
आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है। यूं तो देश की आजादी के लिए उनके योगदान से सारी दुनिया वाकिफ है। मगर पश्चिम बंगाल के नोआपाड़ा थाने से जुड़ा किस्सा आज हम आपको बता रहे हैं।
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देश में आजादी की अलख जगाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का पश्चिम बंगाल के एक थाने से अनूठा संबंध रहा है। एक आंदोलन के समय नेताजी को हिरासत में लेने के बाद थाने में रखा गया तो यहां एक अंग्रेज अफसर ने उनको चाय की पेशकश की, लेकिन उन्होंने देश भक्ति का परिचय देते हुए उसकी चाय लेने से मना कर दिया। आज भी उस चाय के कप और प्लेट को थाने में संजोकर रखा गया है। आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है। यूं तो देश की आजादी के लिए उनके योगदान से सारी दुनिया वाकिफ है। मगर पश्चिम बंगाल के नोआपाड़ा थाने से जुड़ा किस्सा आज हम आपको बता रहे हैं।
93 साल पहले हिरासत में लिए गए थे नेताजी
11 अक्तूबर 1931 को शाम पांच बजे जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस जगद्दल के गोलघर में बंगाल जूट मिल श्रमिक संगठन की एक बैठक को संबोधित करने जा रहे थे तो उनको ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद नेताजी को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में श्यामनगर रेलवे स्टेशन से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर नोआपाड़ा पुलिस स्टेशन ले जाया गया। यहां उन्हें कुछ घंटों तक हिरासत में रखा गया।
अंग्रेज अफसर की ठुकरा दी थी चाय
हिरासत के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक अंग्रेज अफसर ने चाय की पेशकश की। जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। अब हर साल 23 जनवरी को थाने में पुलिसकर्मी न केवल नेताजी की जयंती मनाते हैं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी के स्टेशन पर बिताए गए पलों को भी याद करते हैं। खास बात यह है कि जिस कप और प्लेट में नेताजी के लिए चाय आई थी वह सिरेमिक कप और प्लेट आज भी थाने में संजोकर रखा गया है।
मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद रिहा किए गए थे नेताजी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस को बैठक के लिए जाते वक्त ब्रिटिश पुलिस ने इसलिए गिरफ्तार किया था, क्योंकि अंग्रेजों का मानना था कि उनके भाषण से अशांति फैल सकती है। थाने में जब नेताजी को हिरासत में रखने के बारे में बैरकपुर के जिला मजिस्ट्रेट को पता लगा तो उन्होंने हस्तक्षेप करके 12 अक्तूबर 1931 को आधी रात के आसपास नेताजी को रिहा कराया। नेताजी पर शोध करने वाले जयंत चौधरी बताते हैं कि रिहा करते वक्त शर्त लगाई गई थी कि वे तीन महीने तक नोआपाड़ा में प्रवेश नहीं कर सकते।
थाने में बनाया गया स्मारक
बंगाल के नोआपाड़ा थाने में नेताजी की याद में एक छोटा सा स्मारक भी बनाया गया है। इसमें कप-प्लेट के पास नेताजी की एक तस्वीर रखी गई है। वहीं थाने के एक कमरे में पुस्तकालय बनाया गया है। जिसमें नेताजी के जीवन और विरासत पर किताबें रखी गई हैं। इसके अलावा थाने के बाहर नेताजी की एक मूर्ति गर्व से खड़ी है। मूर्ति के पीछे लगी एक होर्डिंग पर दो तस्वीरें लगी हैं। इसमें नेताजी एक छप्पर वाले कमरे के बाहर बैठे हैं, जिसमें कभी जगदल गोलघर बंगिये जूटमिल वर्कर्स एसोसिएशन हुआ करता था। जबकि दूसरी फोटो में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पुलिस स्टेशन के अंदर कुर्सी पर बैठे हुए दिखाया गया है।
हर साल श्रद्धांजलि देने आते हैं लोग
अब थाने में हर साल नेताजी की जयंती पर स्मारक कक्ष को जनता के लिए खोला जाता है। अधिकारी बताते हैं कि इस साल भी हमने नेताजी की जयंती का आयोजन किया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हम खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि हमें इस पुलिस स्टेशन में काम करने का मौका मिला। जहां नेताजी ने कदम रखा था। वे हमारे प्रेरणास्रोत रहे हैं। हर किसी को इतिहास के इस अध्याय के बारे में जानना चाहिए।